ओंकारेश्वर में डूब प्रभावितों ने शुरु किया जल सत्याग्रह 3

खंडवा – नर्मदा बचाओ आंदोलन एक बार फिर जल सत्याग्रह की राह पर है . ओम्कारेश्वर बाँध का जल स्तर बिना पुर्नवास के बढने से नाराज नर्मदा बचाओ आन्दोलन ने ग्रामीणों के साथ मिलकर कामनखेड़ा ग्राम में अनिश्चित जल सत्याग्रह आन्दोलन शुरू कर दिया है . दरअसल ओंकारेश्वर बांध का जलभराव 193 से बढ़ाकर 196 मीटर तक किया जा रहा है। एनबीए ने मांग की है कि जबतक पुनर्वास पूरा नहीं हो जाता तब तक ओंकारेश्वर बांध को 196 मीटर लेबल तक नहीं भरा जाए . इधर प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के आदेश हवाला देकर गाँव खाली करने की बात कह रहा है .

खंडवा जिले में ओंकारेश्वर बांध के बेक वाटर में एकबार फिर लड़ेंगे जीतेंगे की आवाज़ गूंजने लगी है . ओंकारेश्वर बांध का जलस्तर बढ़ा कर 196 मीटर तक किया जा रहा है। इसे में बेक वाटर के पास के कई गाँव डूब में आ गए है . डूब प्रभावितों के साथ मिलकर एनबीए ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एकबार फिर जल सत्याग्रह का रास्ता अपनाया है . इधर गाँव वालों ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा की दीवली जैसे बड़े त्यौहार पर सरकार हमारी खुशिया छीन रही है .

घोघल गाँव की सकू बाई ने कहा कि सरकार उनके गाँव की बिजली एन त्यौहार के मोके पर काट दी .अगर किसना सरकार की लाइट काट दे तो . किसान अगर नहीं कमाएगा तो सरकार कहा से मज़े करेगी . सकू बाई ने सरकार से सवाल करते हुए कहा की सरकार कहती है की पहले माकन तोड़ दी फिर मुआवजा मिलेगा . तो सरकार बताए की माकन तोड़ देंगे तो रहेंगे कहा .सरकार पहले रहने का इन्तेजाम कर दे फिर डेम में पानी भरे .उन्होंने कहा की आज फैसला कर लिया है जल सत्याग्रह करने का पहले भी जल सत्याग्रह पर बैठे थे और अब जबतक सरकार हमारी नहीं सुनेगी तब तक जल सत्याग्रह पर डाटे रहेंगे . उन्होंने बताया कि पानी भरने से फासले बर्बाद हो गई है .रस्ते बंद हो गए है .ऊपर से पुलिस अलग परेशान कर रही है . दिवाली पर सरकार ने हमारे साथ अन्याय कर दिया हैं .

नर्मदा बचाओ आंदोलन प्रमुख आलोक अग्रवाल का कहना हैं कि अभी पुनर्वास पूरा नहीं हुआ हैं और सरकार बांध में पानी भर रही है. उन्होंने कहा की अभी करीब दो हजार परिवारों का पुनर्वास होना है . देश का कानून कहता है कि जबतक पुनर्वास पूरा नहीं हो जाता तब तक पानी नहीं भरा जा सकता . इसके बाद भी बांध में पानी भरा जा रहा है जिससे घोघल की बिजली काट दी गई है . एक हजार से ज्यादा की जमीन टापू में तब्दील हो गई है .इस लिए डूब प्रभावितों ने यह तय किया है कि जल सत्याग्रह करेंगे .ताकि पानी वापस 193 मीटर पर लाया जाए और जबतक पुनर्वास पूरा नहीं हो जाता तब तक बांध में पानी नहीं भरा जाए .आज से जल सत्याग्रह शुरू कर रहे है और तब तक जल सत्याग्रह करते रहेंगे जबतक हमारी मांगे नहीं मान ली जाती फिर चाहे पानी में हमारे शारीर ही क्यों ना गल जाए .

इधर प्रशासन का कहना है कि वे लगातार प्रभावितों से सवांद कर रहे है .हमारे पास जो भी किसान समस्या लेकर आ रहे है उनकी समस्या का हम तत्काल निराकरण कर रहे है . प्रशासन का कहना है कि हम भी चाहते है की विस्थापित फिर से बस सके और बेहतर तरीके से जिंदगी शुरू कर सके .इसलिए हम दोस्ताना तरीके से उनसे बात कर रहे है उन्हें संसाधन भी उपलब्ध करा रहे है ताकि वे अपना सामान लेकर जहा जाना चाहते है वहां जा सकें .हमने किसी को भी जबरन नहीं हटाया हैं .

इसबीच गाँव वाले जल सत्याग्रह स्थल के पास भी नाच गा कर दिवाली मना रहे हैं.