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वनविभाग में ‘बाबू राज’, नियम विरुद्ध डटे हैं कई सालों से

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खंडवा- शासकीय कार्यालयों में लिपिक श्रेणी के कर्मचारियों को तीन से ज्यादा साल तक रखने का नियम नहीं है। बावजूद इसके वन मंडल उत्पाादन में दर्जनों लेखापाल, उच्च श्रेणी लिपिक और निम्न श्रेणी लिपिक पांच से 27 सालों से टिके हैं। कर्मचारियों की राजनीति करने वाले इन बाबुओं का अब तक कोई अधिकारी कुछ बिगाड़ नहीं पाया है बल्कि इन कर्मचारियों की राजनीति से परेशान कई डीएफओ तो खंडवा पदस्थी को वनवास की तरह भोग कर गए हैं।

सूचना के अधिकार के तहत निकाली जानकारी के अनुसार खंडवा जिले का वन मंडल उत्पादन में विभाग प्रमुखों को एक ही कार्यालय में पदस्थ कर रखा है। इस कार्यालय में पदस्थ लेखापाल कमलजीत चांदना 17 साल, कमलेश प्रसाद डाले 19 साल, जीआर वानखेड़े 14 साल, विजय कुमार चौरसिया 13 साल और बी आर यादव सात साल से डटे हुए हैं।

गौरतलब है कि यह सभी लेखापाल कर्मचारियों के नाम पर बने संगठनों में राजनीति करते हैं और अधिकांश किसी न किसी पर पद पर जमे हुए हैं। इन कर्मचारियों ने अपनी पदस्थी के बाद से दूसरे कार्यालय का मुंह तक नहीं देखा। इतना ही नहीं उच्चश्रेणी लिपिक गंगा सिसोदिया 17 साल से और प्यारेलाल खांडेराव सात साल से इसी कार्यालय में जमे हुए हैं। इस कार्यालय में यही हाल चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का भी है।

इन्होंने तोड़े रिकार्ड, 27 साल से जमे हैं
निम्न श्रेणी लिपिकों में सबसे लंबे समय 27 साल तक टिके रहने का रिकार्ड रविंद्र सिंह चौहान के नाम दर्ज है। 23 दिसंबर 1989 से यहां पदस्थी के बाद चौहान ने किसी अन्य कार्यालय का मुंह नहीं देखा। इनके अलावा जयदीप मुखर्जी और पूनमचंद बडारिया 15 साल से, विकास कुमार मेहता 24 साल से, जितेंद्र पालसिंह सेंगर 20 साल से, नंदकिशोर मराठे 19 साल से, प्रदीप गढ़वाल 23 साल से, राकेश कास्डेकर और नवलसिंह दर्शिमा 13 साल से, सुशीला पाठक 22 साल से, नरेंद्र कुमार पटेल 20 साल से, ओपी सोनी 11 साल से, प्रवीण गुरु 17 साल और संतोष गवई 11 साल से इसी कार्यालय में जमे हुए हैं। #वनविभाग

इस सन्दर्भ में जब जानकारी के लिए विभाग के सीसीएफ पंकज श्रीवास्तव से संपर्क किया गया तो उन्होंने टेलीफोनिक चर्चा में कहा कि आप जो जानकारी चाहते हैं में समझ नहीं पा रहा हूँ ऑफिस में आ कर मिलिए !

कर्मचारियों की स्थापना से सम्बंधित दस्तावेज तेज़ न्यूज़ के पास मौजूद हैं !

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