Kirti Azad requests cops to file FIR against Jaitleyनई दिल्‍ली – डीडीसीए विवाद को लेकर भाजपा सांसद कीर्ति आजाद ने रविवार को प्रेस कॉन्‍फ्रेंस करते हुए कई खुलासे किए। मीडिया को संबोधित करते हुए कीर्ति आजाद ने विकीलिक्‍स फॉर इंडिया के हवाले से किए गए ऑपरेशन की सीडी दिखाई। आजाद ने इससे पहले कहा कि मैं प्रधानमंत्री का फैन हूं जो भ्रष्‍टाचार मिटाने का काम कर रहे हैं। मेरा यह खुलासा भ्रष्‍टाचार को लेकर है और कोई भी इसे निजी तौर पर ना लें।

कीर्ति आजाद ने बताया कि उनके पास एक सीडी है जो एजीएम की है। यह पांच पैकेज में बनी हुई है। इसमें भ्रष्‍टाचार से संबंधित प्रमुख खुलासे जानने को मिल जाएंगे। सीडी दिखाते समय वीकीलीक्‍स फॉर इंडिया और सन स्‍टार नेशनल हिंदी डेली का स्‍क्रॉल चलता दिखाई दिया।

सीडी में कहा गया कि वह सभी डीडीसीए के बारे में ऐसे अहम खुलासे करने जा रही है जो अब तक किसी के सामने नहीं आए है। सीडी में उन पतों की सच्‍चाई के बारे में बताया गया है जिन्‍हें ठेके देने की आरोप लगे हैं। इसके अनुसार जिन फर्जी पतों वाली कंपनियों को करोड़ों के ठेके दिए गए जबकि जांच में यह पते फर्जी निकले।

इसके अलावा भाजपा सांसद ने कहा कि डीडीसीए में प्रिंटर, लैपटॉप भी किराये पर लिए गए और इन पर जमकर फिजुल खर्ची हुई है।बिलों को पास करने से पहले ऐग्जिक्युटिव स्तर की कोई भी बैठक नहीं हुई। कंपनियों को करोड़ों रुपए दे दिए गए, लेकिन उन्हें उनका नेचर ऑफ वर्क नहीं बताया गया।

 

यह रहे मुख्‍य बिंदु

स्टिंग में दावा किया गया कि लैपटॉप का किराया 16900 रुपये प्रतिदिन दिया जाता था वहीं प्रिंटर का किराया 300 रुपये प्रतिदिन।
पूजा के लिए थाली ही 5000 रुपये में मंगाई गई थी।
स्‍टेडियम निर्माण के लिए जो ठेके दिए गए वो बिना कंपनी की सच्‍चाई जाने दिए गए।
2008 में एक कंपनी इंजिनियर्स प्रायवेट लिमिटेड को काम दिया गया जो 24 करोड़ से 57 करोड़ रुपये का हो गया। इसके बाद और भी कई कंपनियां आई लेकिन उनके काम के बारे में कोई जानकारी नहीं।
भ्रष्‍टाचार के लिए लोगों वहीं रहते थे कंपनियों के नाम बदले जाते थे। जो पते दिए गए वो सब फर्जी निकले।

 

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