Home > Hindu > सिंहस्थ कुम्भ में जिंदा समाधि ले रहीं साध्वी त्रिकाल भवंता

सिंहस्थ कुम्भ में जिंदा समाधि ले रहीं साध्वी त्रिकाल भवंता

ujjain simhasthउज्जैन- मध्य प्रदेश के उज्जैन में चल रहे सिंहस्थ कुंभ में बेहतर सुविधाएं न मिलने और शाही स्नान के लिए समय न दिए जाने से नाराज परी (महिला) अखाड़ा की प्रमुख त्रिकाल भवंता जिंदा समाधि लेने के लिए 10 फुट गहरे गड्ढे में बैठ गईं हैं। उन्हें पुलिस अफसर मनाने की कोशिश में लगे हुए हैं।

उज्जैन में 22 अप्रैल से शुरू हुए सिंहस्थ में इस बार परी अखाड़ा ने भी अन्य 13 अखाड़ों की तरह विशेष सुविधाओं के साथ शाही स्नान के लिए समय और घाट आवंटित करने की मांग की थी, लेकिन सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानी।

इस अखाड़े की प्रमुख त्रिकाल भवंता ने मंगलवार को कहा है कि उन्होंने अपने अखाड़े में सुविधाओं के साथ शाही स्नान के लिए समय मांगा था, मगर सरकार ने उनकी मांग पूरी नहीं की, लिहाजा अब वह जिंदा समाधि लेंगी। पुलिस के अनुसार, परी अखाड़ा के करीब खोदे गए 10 फुट गहरे और 15 फुट चौड़े गड्ढे में त्रिकाल भवंता जिंदा समाधि लेने के लिए बैठ गई हैं। उनका कहना है कि उन्हें इसी गड्ढे में मिट्टी से ढक दिया जाएगा।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमरेंद्र सिंह ने संवाददाताओं को बताया कि शिविर की समस्याओं को लेकर त्रिकाल भवंता के समाधि लेने की सूचना मिलने के बाद पुलिस घटनास्थल पर पहुंच गई है, और उन्हें समझाने की कोशिश जारी है। गौरतलब है कि त्रिकाल भवंता ने इससे पहले आमरण अनशन भी किया था, तब प्रभारी मंत्री भूपेंद्र सिंह ने मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया था, लेकिन मागें पूरी नहीं हुईं।

इसके विरोध में वह मंगलवार को 10 फुट गहरे गड्ढे में जिंदा समाधि लेने जा रही हैं। भवंता का कहना है कि वह सरकार से हर स्तर पर अपने अखाड़े और महिला साध्वियों की सुविधा के लिए गुहार लगा चुकी हैं, मगर सभी ने उनकी बात अनसुनी कर दी, जिसके कारण उन्हें जिंदा समाधि लेने का फैसला करना पड़ा है। पुलिस के अनुसार, त्रिकाल भवंता को मनाने तीन महिला पुलिस अधिकारी भी गड्ढे में उतरी हैं, मगर वह उन महिला अधिकारियों के आश्वासन पर भरोसा नहीं कर रही हैं। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान उज्जैन में है, जब तक वह स्वयं मौके पर आकर उन्हें आश्वासन नहीं देते हैं, तब तक वह गड्ढे से बाहर नहीं निकलेंगी।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, सिंहस्थ कुंभ में सिर्फ 13 अखाड़ों को अधिकृत माना जाता है और इन अखाड़ों को ही शासन-प्रशासन की ओर से सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं। इसके साथ ही सिंहस्थ शुरू होने से पहले इनकी पेशवाई निकलती है और शाही स्नान में भी इन अखाड़ों के लिए समय और घाट तय होते हैं। परी अखाड़ा भी यही सुविधाएं मांग रहा था।

सिंहस्थ में व्याप्त अव्यवस्थाओं विरोध में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद पहले ही सुविधाएं न सुधरने पर दूसरा शाही स्नान न करने की घोषणा कर चुका है। इस घोषणा के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सोमवार अपराह्न् उज्जैन पहुंचे और वह साधु-संतों को मनाने की कोशिश कर रहे हैं।

 

Copyright @teznews.com. Designed by Lemosys.com