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मोदी ने बताया था क्यों नहीं पहनते मुस्लिम टोपी?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रविवार को जन्मदिन है। 17 सितंबर 1950 में गुजरात के वडानगर में जन्मे मोदी मई 2014 में वो देश के 14वें प्रधानमंत्री बने। वो आजादी के बाद जन्मे देश के पहले प्रधानमंत्री हैं। उनकी सरकार के साढ़े तीन साल हो चुके हैं। अगला आम चुनाव 2019 में प्रस्तावित है।

नरेंद्र मोदी पीएम बनने से एक महीने पहले इंडिया टीवी के शो आप की अदालत में आए थे। उस समय वो गुजरात के मुख्यमंत्री और बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे। उस इंटरव्यू में उन्होंने बहुत से ऐसे सवालों का जवाब दिया जो आज भी मौजूद हैं। आइए उनके जन्मदिन पर देखते हैं कि पीएम बनने से पहले नरेंद्र मोदी ने उन सवालों का क्या जवाब दिया।

पत्रकार रजत शर्मा ने नरेंद्र मोदी से पूछा, “सोनिया गांधी ने कहा- देश के कोने कोने में इश्तिहारों के जाल बिछाकर एक आदमी को हर मर्ज की दवा और देश के लिए चमत्कारी नेता बनाकर पेश किया जा रहा है?” इस पर नरेंद्र मोदी ने जवाब दिया, “आजकल दिल्ली पर ब्लैकमैजिक वालों का कब्जा है। ब्लैकमैजिक हुआ है। सब गायब हो गया है। जिन्होंने नौजवानों को रोजगार गायब कर दिये, जिन्होंने देश का कोयला गायब कर दिया, बिजली गायब कर दी, तिजोरी गायब कर दी तो ब्लैकमैजिक से अच्छी है ये जादूगरी।”

शो में नरेंद्र मोदी से पूछा गया कि सोनिया गांधी ने कहा है कि “नरेंद्र मोदी ऐसा माहौल बना रहे हैं कि इनसे बड़ा देशभक्त कोई है ही नहीं। देशभक्ति के नकली नारे लगाकर कुर्सी हासिल करना चाहते हैं।” इस पर नरेंद्र मोदी ने कहा था, “इस देश के सवा सौ करोड़ देशवासी देशभक्त हैं। किसी की देशभक्ति किसी से नीचे नहीं होती, किसी से ऊपर नहीं होती। इसलिए न मैं किसी की देशभक्ति पर शक नहीं करता हूं और न ही मैं महान देशभक्त होने का दावा करता हूं।”

“जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा- नरेंद्र मोदी पंजाब गये तो वहां सरदारों की दस्तार कबूल की, अरुणाचल प्रदेश गये तो उनकी टोपी कबूल की, असम गये तो उनकी भेषभूषा कबूल की लेकिन जब इमाम साहब ने टोपी पहनाने की कोशिश की तो लौटा दिया, इनकार कर दिया?” इस पर नरेंद्र मोदी ने कहा, “अगर टोपी पहनने से ही कोई एकता का प्रतीक बन जाता तो…मैंने अब तक गांधीजी को अब तक कोई ऐसी टोपी पहने देखा नहीं है, मैंने सरदार वल्लभ भाई पटेल को इस प्रकार की टोपी पहनकर फोटो निकाला कभी देखा नहीं है, मैंने पंडित नेहरू को भी कभी इस प्रकार की टोपी पहने हुए देखा नहीं है…तो ये एक भारत की राजनीति में एक विकृति आई है, विकृति आई है कि अपीजमेंट (तुष्टिकरण) के लिए कुछ भी करो, मेरा काम है सब संप्रदाय का सम्मान करना, सब परंपरा का सम्मान करना पर मेरी जो परंपरा है उसको मुझे स्वीकार करना…मैं मेरी परंपराओं को लेकर जीता हूँ, हरेक की परंपरा का सम्मान करता हूं, इसलिए मैं ये टोपी पहनकर, फोटो निकाल कर के, लोगों की आँख में धूल झोंकने का पाप मैं नहीं कर सकता। लेकिन कोई अगर किसी की टोपी उछालता है तो उसको कड़ी से कड़ी सजा करने का मैं मन रखता हूँ।”

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