भोपाल : इन दिनों एससी-एसटी ऐक्ट के खिलाफ सवर्णों की नाराजगी देखने को मिल रही है। चुनावी राज्य मध्य प्रदेश में यह नाराजगी खुलकर सामने आ रही है और लोगों ने इस बार वोटिंग में नोटा दबाने का फैसला किया है।

यहां कुछ लोगों ने अपने घरों के बाहर पोस्टर टांगे हैं। इसमें लिखा है- ‘मैं सामान्य वर्ग से हूं। कृपया कोई भी राजनैतिक दल वोट मांग कर शर्मिन्दा न करें।’

सरकार से नाराज लोगों ने कहा, ‘एससी-एसटी रिजर्वेशन खत्म होना चाहिए। इससे सामान्य वर्ग काफी प्रभावित हो रहा है। अगर इसे हटाया नहीं गया तो हम आने वाले चुनाव में निश्चित रूप से नोटा दबाएंगे।’

मध्य प्रदेश में सामान्य तबके की इस नाराजगी को दूर करने के लिए सीएम शिवराज सिंह चौहान ने पिछले दिनों कहा था कि इस ऐक्ट के तहत की गई शिकायत पर बिना जांच की गिरफ्तारी नहीं होगी।

चौहान ने कहा था, ‘एससी/एसटी ऐक्ट का मध्य प्रदेश में दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा। इस एक्ट के तहत की गई शिकायत संबंधी मामले में पूरी जांच के बाद ही मामला कायम किया जाएगा। बिना जांच की गिरफ्तारी नहीं होगी। इसके लिए मध्य प्रदेश सरकार द्वारा जल्द ही निर्देश जारी किया जाएगा।’

28 नवंबर को मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। 11 दिसंबर को मतगणना होगी और उसी दिन परिणाम आएंगे। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी ऐक्ट में बदलाव का आदेश देते हुए इसमें गिरफ्तारी से पहले जांच का आदेश दिया था।

हालांकि केंद्र सरकार ने संसद के जरिए कोर्ट के आदेश को पलट दिया था। इसके बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में सवर्ण आंदोलन शुरू हो गया था।

फैसले से पीछे नहीं हटेगी बीजेपी!

सवर्णों की नाराजगी का असर चुनावी नतीजों पर पड़ना तय माना जा रहा है। फिलहाल इससे बीजेपी को ज्यादा नुकसान होने की बात कही जा रही है क्योंकि सवर्णों के वोटों का बड़ा हिस्सा बीजेपी को ही मिलता रहा है। पिछले दिनों पीएम मोदी की इसी मसले पर सीनियर मंत्रियों संग मीटिंग हुई।

सूत्रों के अनुसार सरकार एससी-एसटी ऐक्ट में बदलाव के फैसले से पीछे नहीं हटेगी। दरअसल, 2014 आम चुनाव में दलितों के बड़े हिस्से ने बीजेपी को वोट दिया था और पार्टी को मिली बड़ी जीत के पीछे यह बड़ा फैक्टर बना था। ऐसे में 2019 के चुनाव में उस बढ़त को पार्टी खोना नहीं चाहती।