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कफन नहीं खरीद सके, लाश के साथ 3 दिन से सो रहे घरवाले

पंजाब के एक गांव से आई घोर गरीबी की जो घटना सामने आई है इंसानियत को शर्मसार करने वाली है। तीन दिन पहले 40 साल के दिलीप सिंह मौत सड़क दुर्घटना में हो गई थी, लेकिन परिजनों के पास कफन के लिए पैसे न होने से घरवाले तीन दिन से शव को घर में ही रखा हुआ है। दिल को झकझोर देने इस घटना का पीड़ित सिर्फ एक ही परिवार नहीं है!

दिलीप सिंह की पत्नी पालम रात को शव के पास लेटती है ताकि कोई जानवर (कुत्ता, बिल्ली आदि) शव को न नोच डाले। उनकी एक तीन साल की बेटी थी अंजली, उसकी भी मौत हो चुकी है लेकिन अभी तक उसका अंतिम संस्कार भी नहीं हो सका। पालम ने हिन्दुस्तान टाइम्स से बताया कि उसके पास इतने पैसे नहीं है कि वह दोनों का अंतिम संस्कार कर सके। किसी कारण से पालम की भी एक टांग फ्रक्चर्ड है और वह अपना भी इलाज नहीं करा सकती।

इस घोर लाचारी का शिकार पालम अकेली नहीं है बल्कि मुहल्ले में रह रही 21 साल की नीलम भी इस दुर्घटना में विधवा हो गई है। उसका पति 23 वर्षीय मोहिंदर की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई है। मोहिंदर का शव भी अभी घर में रखा है। इस पर नीलम का कहना है, ‘मैं चाहती हूं कि मैं भी वहां पर होती जहां पर मेरे पति का एक्सीडेंट हुआ था। नीलम सात माह की गर्भवती है और उसके पास भी पति का अंतिम संस्कार करने के लिए पैसे नहीं हैं।

  हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, जिस दुर्घटना में पांच लोगों की मौत हुई है उनमें से सिर्फ एक अंतिम संस्कार किया गया है जबकि चार लोगों के शव मंगलवार तक उनके घर पर ही रखे रहे। हादसे का शिकार हुए जिस शख्य का अंतिम संस्कार हुआ है वह ऑटो ड्राइवर था।

मंगलवार को घटना की जानकारी मिलने के बाद रेड क्रॉस सोसाइटी की ओर से प्रत्येक पीड़ित परिवार को 4000 रुपए दिए गए ताकि वह अपने परिजन का अंमित संस्कार कर सकें। एक मृतक के भाई भोला ने बताया कि वह बहुत ज्यादा गरीब हैं। उनके पास अंतिम संस्कार तक के लिए पैसे नहीं हैं।

सभी पीड़ित परिवार जालंधर जिले के लांब्रा गांव के पास अस्थाई घरों में रहते हैं। सभी लोग यहां मजदूरी कर जीवन यापन कर रहे थे।
बताया जा रहा है कि हादसा जब हुआ जब तीन परिवारों के कुछ लोग पास के चर्च में क्रिसमस मनाने एक ऑटो से जा रहे थे। तभी दूसरा ऑटो उनके ऑटो से भिड़ गया। इस हादसे में दोनों ऑटो में सवार लोगों में 5 की मौत हो गई जिसमें एक ऑटो चालक भी शामिल है।

खबर के मुताबिक पीड़ित परिवारों के छह और सदस्य भी हादसे में घायल हुए हैं जिनका पैसों की कमी से इलाज नहीं कराया जा रहा। एक व्यक्ति के सिर में बहुत ज्यादा चोट आने पर उसे सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

चर्च प्रशासन और कुछ गांव वाले मिलकर पीड़ित परिवारों को पिछले तीन दिन से खाना दे रहे हैं। घटना की जानकारी मिलने पर पीड़ित परिवार से इलाके एसडीएम परमवीर ने मुलाकात की और उन्हें आर्थिक मदद का भरोसा दिया। वहीं डिप्टी कमिश्नर विरेंद्र कुमार ने कहा है कि पीड़ितों का इलाज मुफ्त में कराया जाएगा और उनके सारे खर्च प्रशासन द्वारा वहन किए जाएंगे।

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