शाह-राजनाथ से मिले सिंधिया, कृषि मंत्री यादव ने कहा इतनी जल्दी तो गिरगिट भी रंग नहीं बदलता

सिंधिया ने भाजपा ज्वाइन करने के बाद किसान कर्ज माफ़ी पर भी सवाल उठाए थे। जिसे लेकर अब सियासत में वार-पलटवार शरू हो गया हैं। प्रदेश कृषि मंत्री सचिन यादव ने सिंधिया के ट्विटर अकाउंट का स्क्रीन शॉर्ट ट्वीट कर लिखा की इतनी जल्दी तो गिरगिट भी रंग नहीं बदलता है ।

भोपाल : अगले दिन यानी शुक्रवार 13 मार्च को दोपहर 12 बजे के आसपास सिंधिया फिर से भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचेंगे। जहां फिर से पं. दीनदयाल उपाध्याय, विजयाराजे सिंधिया, कुशाभाऊ ठाकरे की प्रतिमाओं और माधवराव सिंधिया के चित्र पर माल्यार्पण कर वे वरिष्ठ भाजपा नेताओं के साथ राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने विधानसभा जाएंगे। सिंधिया ने भाजपा ज्वाइन करने के बाद किसान कर्ज माफ़ी पर भी सवाल उठाए थे। जिसे लेकर अब सियासत में वार-पलटवार शरू हो गया हैं। प्रदेश कृषि मंत्री सचिन यादव ने सिंधिया के ट्विटर अकाउंट का स्क्रीन शॉर्ट ट्वीट कर लिखा की इतनी जल्दी तो गिरगिट भी रंग नहीं बदलता है ।

यादव ने लिखा जेएम सिंधिया जी, “इतनी जल्दी तो गिरगिट भी रंग नहीं बदलता है।” 4 मार्च, 2020 को दोपहर 1 बजकर 28 मिनट पर आपके ट्विटर हैंडल पर आपने ही स्वीकारा है कि जय किसान फसल ऋण माफी योजना के दूसरे चरण में करेरा विधानसभा के 1200 किसानों के 10 करोड़ को मिलाकर

भोपाल में बुधवार को पॉलिटेक्निक चौराहा के पास लगाए गए भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया की तस्वीर पर स्याही फेंकी गई और पोस्टर का एक हिस्सा फाड़ा गया है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के बाद पहली बार भोपाल आगमन को लेकर समर्थकों द्वारा लगवाए गए पोस्टर्स को नगर निगम के अमले ने उतार दिया है। भोपाल नगर निगम की टीम ने इन पोस्टरों को अवैध बताते हुए यह कार्रवाई की।

ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थन में मध्यप्रदेश के ग्वालियर, गुना, शिवपुरी के कांग्रेस जिलाध्यक्षों सहित 10 हजार से ज्यादा कार्यकर्ताओं ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। ये इस्तीफे राज्य स्तर से लेकर ब्लॉक स्तर तक हुए हैं।

बंगलूरू गए कांग्रेस के 19 में से 17 विधायकों ने बुधवार को वीडियो जारी कर ज्योतिरादित्य सिंधिया का समर्थन किया है। इन विधायकों ने कहा कि हम पूरी तरह से महाराज के साथ हैं। महाराज कहेंगे तो कुएं में भी कूद जाएंगे।

कांग्रेस के बागी विधायकों ने कहा कि उनसे कांग्रेस के किसी नेता ने मुलाकात नहीं की है। बंगलूरू में कांग्रेस के किसी नेता से मिलने या संपर्क करने की खबरें झूठी हैं। बता दें कि मुख्यमंत्री कमलनाथ और दिग्विजय सिंह ने कल दावा किया था कि 19 में से 13 विधायक फिर से कांग्रेस के साथ लौटने को तैयार हैं।

कमलनाथ सरकार में मंत्री और डबरा से विधायक इमरती देवी ने कहा कि हमें खुशी है कि सिंधिया ने भाजपा में जाने का निर्णय लिया है। महाराज जहां भी बोलेंगे वहां जाने को तैयार हूं। वे कुएं में कूदने कहेंगे तो वो भी कर दूंगी।

230 सदस्यीय मध्यप्रदेश विधानसभा में से दो सीटें खाली हैं, जिसके बाद कुल संख्या 228 है। अब तक 22 कांग्रेस विधायकों ने इस्तीफा भेजा है। अगर इन विधायकों का इस्तीफा स्वीकार हो जाता है तो कुल संख्या 206 हो जाती है, जिसके बाद बहुमत के लिए 104 विधायकों की जरूरत होगी।

22 विधायकों के इस्तीफे और चार के लापता होने के बाद कांग्रेस की सीटें 114 से घटकर 88 रह जाती हैं। वहीं, भाजपा की 107 सीटें हैं। 2018 में कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस ने चार निर्दलीय, दो बसपा और एक सपा विधायक के समर्थन से कुल 121 विधायकों के साथ सरकार बनाई थी।

भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह का शुक्रिया कि उन्होंने हमें अपने परिवार में स्थान दिया। मेरे जीवन में दो तारीख काफी अहम रही हैं, इनमें पहला 30 सितंबर 2001 जिस दिन मैंने अपने पिता को खोया, वह जिंदगी बदलने वाला दिन है।

दूसरी तारीख 10 मार्च 2020 जो उनकी 75वीं वर्षगांठ थी जहां मैंने जीवन में एक बड़ा निर्णय लिया है। आज मन व्यथित है और दुखी भी है। जो कांग्रेस पहले थी वह आज नहीं रही, उसके तीन मुख्य बिंदु हैं। पहला कि वास्तविकता से इनकार करना, दूसरा नई विचारधारा और तीसरा नए नेतृत्व को मान्यता नहीं मिलना।