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शिवराज सरकार ने फिर उजाड़े आदिवासीयों के घर, नर्सरी

Baitul in Madhya Pradeshबैतूल : 2016, शिवराज सरकार ने नए साल की शुरुवात आदिवासीयों पर अत्याचार के साथ की आदिवासी नेता अनुराग मोदी ने प्रेस नोट में बताया की आठ दिन के धरने के बाद 31 दिस्मबर को, मुख्मंत्री के दखल पर बैतूल सांसद, विधायक व्दारा बैतूल कलेक्टर के माध्यम से जिस वायदे को धरनारत आदिवासीयों से मीडिया के सामने किया था, उससे वो आज मुकर गई| और आज सुबह वन विभाग और पुलिस के 50 अधिकारीयों से ज्यादा की टीम ने उमरडोह, बोड- पीपल्बर्रा , चिचोली में आदिवासीयों के दुबारा बना गए सभी 45 घर पुन: तोड़ दिए और फलदार पौधों की नर्सरी भी मिटा दी ।

नर्सरी में हजार के लगभग आम, जाम, आदि के पौधे बारिश में जंगल में लगाने के लिए आदिवासीयों ने तैयार कर रखे थे| इस घटना की अपने मोबाईल में व्हीडीयों रिकॉर्डिंग कर रहे पपलेश गौंड को आर. के. यादव पुलिस वाले ने डंडे से जोर से मारा और मोबाइल तोड़ने की कोशिश की ।

पीड़ित आदिवासी रवी पुत्र मुन्ना ने कहा, जिस सरकार की जवाबदारी हम आदिवासीयों की रक्षा की है, जब वो ही हमारा शिकार करने लगे, तो हम कैसे बचेंगे| ऐसे में मजबूरी में कहीं हमें भी जिले के अन्य आदिवासीयों की तरह आत्महत्या का रास्ता नहीं चुनना पड़े|

उल्लेखनीय है कि 19 दिस्मबर को वन विभाग, पुलिस और राजस्व अधिकारीयों के दो सौ के दल ने इस गाँव में अतिक्रमण हटाने के नाम पर घर और फसल जे सी बी से मिटा दी थी और फसल और पानी में कीटनाशक का जहर डाल दिया था| इस घटना के विरोध में 24 दिसम्बर को आदिवासी गाँव से बैलगाड़ी लेकर निकले और 25 दिस्मबर से बैतूल कलेक्टर कार्यालय के सामने धरना दिया था|

उस दौरान 4 डिग्री तापमान होने के बावजूद, बच्चों सहित खुले आसमान में धरना दे बैठ गए| आदिवासीयों के इस दर्द को बैतूल मीडिया और जनता ने समझा और भरपूर साथ दिया| जिसके परिणाम स्वरूप बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल की पहल पर आदिवासीयों और सरकार और शासन के नुमाईदों के बीच एक समझौता हुआ| इस समझौते में आदिवासीयों ने जो निम्न बिंदु रखे थे उसको स्वीकार करते हुए, बैतूल संसद और कलेक्टर ने बैतूल और पीडित आदिवासीयों के समक्ष बयान दिए|

यह बिंदु थे|
1- 19 दिसम्बर की घटना टास्क फ़ोर्स के इशारे पर हुई है; जिसमें, वन विभाग, राजस्व और पुलिस तीनों विभाग शामिल है – इसके मुखिया बैतूल कलेक्टर है| ऐसे में प्रशासन व्दारा जाँच कैसे की जा सकती है?

हमारा सुझाव है: इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इस तरह के मामलों की जाँच करने के लिए बने शिकायत निवारण प्राधिकरण की जाँच रिपोर्ट पर सांसद, बैतूल विधायक और म. प्र. सरकार तुरंत कार्यवाही करे ।

2 -इस घटना में जिन आदिवासीयों को जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई की जाए ।

3 -वन अधिकार कानून, 2006 की धारा 3 (1) में जंगल पर दिए गए अधिकार धारा 6 के अनुसार ग्रामसभा को तय करने है और धारा 4(5) के अनुसार इसे तय होने तक जिले में इस कानून का उल्लघन करते हुए किसी को भी उसके कब्जे की जंगल जमीन से बेदखल नहीं किया जाए| किस आधार पर दावे तय होंगे इसमें पी ओ आर या गूगल मेप के बात नहीं है; इसलिए कानून में जिन 13 सबूतों को मान्यता दी गई है उन्हें मानते हुए कानून की भावना के तहत आदिवासीयों पर हुए ऐतिहासिक कानून को दूर क्या जाएगा ।

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