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यूपी के राज्यपाल बोले, उत्तर प्रदेश है उत्तराखंड कि मातृभूमि

लखनऊ: यूपी के राज्यपाल राम नाईक ने शुक्रवार देर शाम को गोमती नदी तट पर स्थित गोविन्द बल्लभ पंत उपवन में उत्तराखण्ड महापरिषद द्वारा आयोजित ‘उत्तराखंड महोत्सव 2017‘ का उद्घाटन किया। राज्यपाल ने कार्यक्रम में पर्वतारोही पद्मश्री चन्द्र प्रभा ऐतवाल को अंग वस्त्र व स्मृति चिन्ह देकर ‘उत्तराखंड गौरव सम्मान’ से सम्मानित किया। कार्यक्रम में संगीत विशेषज्ञ हेम सिंह एवं अन्य को भी सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उत्तराखण्ड महापरिषद के अध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट ने राज्यपाल को अंग वस्त्र व प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में हरीश चन्द्र पंत महासचिव उत्तराखण्ड महापरिषद सहित अन्य पदाधिकारीगण व लखनऊ में रहने वाले उत्तराखण्ड के मूल निवासी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे ।

राज्यपाल ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पर्वतीय क्षेत्र का गौरवशाली इतिहास रहा है जिसकी संस्कृति की अपनी विशेषता है। उत्तराखंड को अनेक नामों से पुकारा जाता है। इस भूमि को देवभूमि, स्वर्गभूमि, वीरभूमि आदि नामों से सम्बोधित किया जाता है। भगवान राम ने भी लंका जीतने के बाद अयोध्या आना पसंद किया और कहा कि मातृभूमि स्वर्ग से भी बड़ी होती है।उत्तराखंडवासी लखनऊ में उत्तराखंड महोत्सव का आयोजन करके अपनी मातृभूमि को याद करते हैं। उन्होंने कहा कि लखनऊ में रहकर भी उत्तराखंड से जुड़ाव प्रसन्नता की बात है।

नाईक ने बताया कि जब उत्तराखंड राज्य अस्तित्व में आया तब वे केन्द्र में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री थे। तत्समय उत्तराखंड सहित छत्तीसगढ़ एवं झारखण्ड राज्य भी शांतिपूर्वक बने। उत्तराखण्ड ने सुमित्रानंद पंत जैसा कवि, सुंदरलाल बहुगुणा जैसा पर्यावरणविद् बछेन्द्री पाल, प्रथम परमवीर चक्र विजेता सोमनाथ सहित अनेक ऐसे लोग दिये हैं जिन्हें आज भी सम्मान से स्मरण किया जाता है।

राज्यपाल ने उत्तराखंड महापरिषद की प्रशंसा करते हुये कहा कि महापरिषद ने उत्तराखण्ड के साथ-साथ अन्य प्रदेशों के कलाकारों को यहाँ आमंत्रित करके सांस्कृतिक आदान प्रदान का सराहनीय कार्य किया है। महापरिषद द्वारा उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड सहित मध्य प्रदेश, राजस्थान, जम्मू कश्मीर, हरियाणा, नागालैण्ड, मणिपुर, छत्तीसगढ़ आदि से कलाकार आमंत्रित किये गये हैं। महोत्सव में मिस्र से आये कलाकार भी अपनी प्रस्तुति देंगे। उन्होंने चुटकी लेते हुये कहा कि अच्छा होता जो दक्षिण भारत के प्रदेशों सहित महाराष्ट्र, गुजरात और केरल के भी कलाकारों को आमंत्रित किया जाता।

राज्यपाल ने कहा कि देश में विभिन्न भाषा और कलाओं को देखकर भारत की संस्कृति एवं महत्ता समझ में आती है। हर क्षेत्र की अपनी पहचान और विशेषता होती है। भारत विविधता का देश है जहाँ अनेक मौसम सहित विभिन्न वेशभूषा तथा खान-पान देखने को मिलता है। दिल्ली देश की राजनैतिक राजधानी है, मुंबई आर्थिक राजधानी है, बनारस आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक राजधानी है। उन्होंने कहा कि ठीक उसी प्रकार लखनऊ कला की राजधानी है।

महोत्सव में उत्तराखंड महापरिषद के अध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट ने स्वागत उद्बोधन दिया तथा अन्य लोगों ने भी अपने विचार रखें। उद्घाटन के बाद महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किये गये।

रिपोर्ट @शाश्वत तिवारी

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