New-Delhiनई दिल्ली – दिल्‍ली में सत्‍ता के गलियारों से मिल रही खबर पर यकीन किया जाए, तो देश की राजधानी का नाम जल्‍द ही बदल सकता है। यदि ऐसा हो गया तो दिल्‍ली को दिल्‍ली नहीं, बल्कि ‘इम्‍पीरियल सिटी ऑफ दिल्‍ली’ कहा जाएगा। वहीं फिर पुराने शहर यानी पुरानी दिल्‍ली को ‘इम्‍पीरियल सिटी ऑफ शाहजहानाबाद’ कहा जाएगा।

यदि ऐसा होता है तो दिल्‍ली भी देश के उन शहरों में शामिल हो जाएगा, जिनका अंग्रेजी शासनकाल में दिया गया नाम बदल दिया गया है। फिलहाल इस सूची में मुंबई (बंबई/बॉम्‍बे), चेन्‍नई (मद्रास), बेंगलुरू (बैंगलोर), कोलकाता (कलकत्‍ता) और पुणे का नाम शामिल है।

गौरतलब बात यह है कि अब तक जिन शहरों के नाम बदले गए हैं, उन्‍हें बदलने के लिए सार्वजनिक मांगें उठाई गई थीं और मुहिम भी चली थी। लेकिन दिल्‍ली के मामले में ऐसा नहीं है।

दरअसल, केंद्र को लगता है कि दिल्‍ली नाम अब उतना आकर्षक नहीं रह गया है, कि इससे पश्चिमी देशों के पर्यटकों को लुभाया जा सके। इसलिए यह तय हुआ कि दिल्‍ली शहर के नाम से पहले ‘इम्‍पीरियल’ शब्‍द को जोड़ दिया जाए।

माना जा रहा है कि यह किसी वरिष्‍ठ नौकरशाह के दिमाग की उपज है। क्‍योंकि ऐसा करने से देश की राजधानी का नाम यूनेस्‍को की हेरिटेज सूची में शामिल होने की संभावना बढ़ जाएगी। इससे विदेशी पर्यटकों को ज्‍यादा से ज्‍यादा संख्‍या में भारत और खासकर दिल्‍ली के लिए आकर्षित किया जा सकेगा।

एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के अनुसार दिल्‍ली के वीवीआईपी क्षेत्र यानी लुटियन जोन को इम्‍पीरियल सिटी ऑफ न्‍यू दिल्‍ली नाम से यूनेस्‍को की सूची में शामिल किए जाने की कवायद शुरू भी हो गई है।

यूनेस्‍को द्वारा वेरिफिकेशन के बाद दिल्‍ली विकास प्राधिकरण पुनर्नामकरण की प्रक्रिया शुरू कर देगा। लेकिन यहीं से असल दिक्‍कत भी शुरू होती है।

दरअसल, यूनेस्‍को से हेरिटेज सिटी का दर्जा पाने की प्रक्रिया काफी कठिन है। इस तरह का दर्जा पाने की कोशिश हवाना, रोम और टिम्‍बक्‍टू ने भी की थी, लेकिन यूनेस्‍को की 10 पॉइंट गाइडलाइन पूरा न करने की वजह से उन्‍हें यह खिताब नहीं मिल सका था। Welcome to the Imperial City

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