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जब कलेक्टर पहुँचे जंगल ,फिर क्या हुआ

kanha-pench-walkमंडला : मध्य प्रदेश वन विभाग और वर्ल्ड वाइड फण्ड फॉर नेचर (डब्लूडब्लूएफ – इंडिया) द्वारा आयोजित पेंच – कान्हा वाक 2016 अपनी मंजिल की ओर अग्रसर हो रही है। वन और वन्य प्राणियों के प्रति जागरूकता लाने यह पद यात्रा 10 नवम्बर को डब्लूडब्लूएफ – इंडिया के टीम लीडर सोमेन डे के नेतृत्व में पेंच से शुरू हुई थी। यह यात्रा प्रतिदिन करीब 10 किलोमीटर का सफर पैदल जंगल में तय कर रही है। यात्रा का समापन 17 नवम्बर को कान्हा टाइगर रिज़र्व के इको सेण्टर में होगा। यात्रा प्रति दिन सुबह 7 बजे शुरू होती है। यह यात्रा जंगल और उसकी पगडंडियों के रास्ते आगे बढ़ती है। शाम को निर्धारित स्थान पर पहुँच कर यात्रा रुक जाती है। यदि वह कोई शासकीय भवन मिला तो ठीक नहीं तो टेंट में रात बिताई जाती है। यह यात्रा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर के प्रति जागरूकता पैदा करने में अपनी हम भूमिका निभा रही है।

डब्लूडब्लूएफ – इंडिया के प्रोजेक्ट ऑफिसर परसराम चौहान ने बताया कि पेंच – कान्हा वाक 2016 के लिए डब्लूडब्लूएफ की वेबसाइट के जरिये आवेदन आमंत्रित किये गए थे। इसमें पूरे देश से बड़ी संख्या में वन और प्रकृति प्रेमियों ने आवेदन कर पद यात्रा में शामिल होने की इच्छा जताई थी। चयन के आधार पर पूरे देश से केवल 30 लोगों को ही इसमें शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। चयनित प्रतिभागियों के अलावा इस यात्रा में बायो डाइवर्सिटी एक्सपर्ट, वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट और नेचुरलिस्ट्स भी शामिल है। रुखड़, डंडलखेड़ा, कालीमाटी, बंजारी सोनखर, मसनबर्रा होते हुए यात्रा तुरुर पहुँच चुकी है। तुरुर के बाद भरवेली, झंगुल होते हुए यह यात्रा कान्हा पहुंचेगी।

परसराम चौहान ने बताया कि सिवनी कलेक्टर धनराजू एस ने भी बंजारी सोनखर से मसनबर्रा तक करीब 10 किलो मीटर की पदयात्रा की। इस दौरान उन्हें जंगल, वन्य प्राणियों के पग मार्क्स और बर्ड वाचिंग का भी आनंद लिया। उन्होंने वन, वनस्पति और जड़ी बूटियों के बारे में भी जानकारी का आदान – प्रादान किया कलेक्टर श्री धनराजू के यात्रा में शामिल होने से प्रतिभागियों का हौसला भी बढ़ और वो प्रोत्साहित हुए। यात्रा के दौरान प्रतिभागियों को वन ,वन्य प्राणियों और प्रकृति के बारे में जागरूक किया जा रहा है। यात्रा के दौरान पड़ने वाले वन ग्रामों के ग्रामीणों को भी जागरूक किया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों और जंगल के बीच बेहतर तालमेल बना रह सके। इसके साथ ही प्रतिभागियों को खेती, वनस्पति, ग्रामीणों का जंगल से लगाव, वनोपज, जड़ी बूटी, वन ग्राम आदि के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है।

इस यात्रा का एक मकसद यह भी है कि लोगों को इस बात के लिए भी जागरूक और प्रेरित किया जा सके कि वो अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए जंगल को संभाल कर रख सकें। यात्रा में शामिल प्रतिभागी अपने को तरोताज़ा महसूस कर रहे है। शहरों की भाग दौण्ड और शोर \ शराबे व प्रदूषण से दूर प्रकृति की गोद में शुद्ध वायु ने उन्हें शारीरिक और मानसिक सुकून के साथ – साथ एक ऐसा अनूठा अनुभव प्रदान किया है जिससे वो अब तक अनजान थे। यात्रा के बाद अपने घर लौटकर ये प्रतिभागी प्रकृति के सन्देश वाहक का किरदार अदा करेंगी। इस यात्रा को सफल बनाने में राजीव गोप, ग्रीश पटेल , कमल ठाकुर, ज्योतिर्मय जेना सहित डब्लूडब्लूएफ इंडिया अपनी उल्लेखनीय भूमिका का निर्वहन कर रहा है।
@सैयद जावेद अली





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