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नरेन्द्र मोदी के आगमन से दौड़ पड़ी भगवा लहर

Narendra Modi

अम्बेडकरनगर  [ TNN ]  समाजवाद के पुरोधा डा. राममनोहर लोहिया की जन्मस्थली व बाबा साहब डा. भीमराव अम्बेडकर के नाम पर सृजित अम्बेडकरनगर जनपद के सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थली शिवबाबा के परिसर में भाजपा के नरेन्द्र मोदी के कदम पड़ते ही सियासी परिवर्तन की पटकथा भी लिख दी गयी। अविभाजित फैजाबाद अयोध्या का हिस्सा रहा अकबरपुर ‘‘सु‘‘ अब अम्बेडकरनगर सामान्य संसदीय क्षेत्र में रामलहर के दौरान 1991 में महज एक सौ छप्पन मतों के अन्तर से भगवा परचम लहराने में चूके मतदाता दो दशक के लम्बे अन्तराल के बाद इस बार इतिहास रचने को आतुर दिख रहे हैं।

भजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी की सोमवार को शिवबाबा की धरती पर उमड़े चिशाल जनसैलाब ने इतिहास रचने एवं परिवर्तन का संकल्प लिया तो अम्बेडकरनगर में भगवा परचम फहारने की उम्मीद न सिर्फ हिलोरे मारने लगी बल्कि पहली दफा ही सही कमल खिलाने के आसार भी नजर आने लगा। वैसे भी 55-अम्बेडकरनगर की सियासी फिजाओं में इस बार शुरू से ही भगवा रंग चटख होता दिख रहा था।

भाजपा ने सबसे नये एवं शैक्षिक जगत के प्रतिष्ठित चेहरे डा. हरिओम पाण्डेय को इस बार मैदान में उतार कर बाजी मारने की योजना वनायी थी। पहले भाजपा के फायर ब्राण्ड नेता सांसद विनय कटियार फिर अपना दल की राष्टीय महासचिव अनुप्रिया पटेल, भाजपा विधायक संगीत सोम व पूर्व सीएम कल्याण सिंह ने नुक्कड़ सभाएं एवं सभाएं कर उम्मीदों का कमल खिलाने का जतन किया तो उसे भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी के सबसे खासमखास भाजपा महासचिव अमितशाह ने जनसम्पर्क के जरिये व जनसभा कर परवान चढ़ाने का प्रयास किया। स्टार प्रचारकों की कामयाब सभाओं एवं सभी जाति वर्गों के लोगों से मिल रहे अपार सहयोग एवं समर्थन ने भाजपाइयों को स्वप्न लोक की उड़ान तो भरा ही दिया था।

सोमवार 05 मई 2014 को खुद भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी के अम्बेडकरनगर में शिवबाबा की धरती पर कदम पड़ते ही रही सही कसर भी पूरी हो गयी। नरेन्द्र मोदी की जनसभा में उमड़े जनसमुद्र ने अम्बेडकरनगर की सियासत में ऐतिहासिक परिवर्तन होने के भी संकेत दे दिये। यहाँ बता दें कि लोकसभा चुनाव मतदान 7 मई 2014 को होना है। शिवबाबा ब्रम्हस्थली के प्रांगण में उमड़े जनसमुदाय एवं जन भावनाओं का रूख भांप मोदी ने आवाम से सपा, बसपा, काँग्रेस के सफाये का आह्वान भी कर डाला। उपस्थित जनसमुद्र ने उन्हें आश्वस्त करते हुए यहां बड़े सियासी परिवर्तन होने का भी संकेत दे दिया।

भाजपा पी.एम. उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी का आगमन और जनसभा का सम्बोधन पार्टी के नीति नियन्ताओं तथा रणनीतिकारों को काफी राहत एवं सुकून पहुंचाने वाला रहा। ज्ञातव्य हो कि अम्बेडकरनगर के नाम से नये संसदीय क्षेत्र बनने एवं उससे पूर्व अकबरपुर ‘‘सु‘‘ के नाम से पुराने क्षेत्र में अब तक किसी भी संसदीय चुनाव में भाजपा व जनसंघ को कामयाबी नहीं मिल पायी थी। रामलहर के दौरान हुए लोकसभा व विधानसभा चुनाव में भी भाजपा सभी सीटों पर फतक नहीं कर पायी।

लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी रहे बेचनराम सोनकर को महज एक सौ छप्पन मतों के मामूली अन्तर से पराजय का मुँह देखना पड़ा तो जहांगीरगंज विधानसभा एवं कटेहरी विधानसभा सीट ही भाजपा के कब्जे में आ सकी। 1996 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को जलालपुर सीट पर ता कामयावी मिली लेकिन अन्य सीटों पर फतह नहीं हासिल हो पायी। वर्ष 1996 में अकबरपुर लोकसभा सीट पर बसपा के घनश्यामचन्द खरवार को कामयावी मिली तो वर्ष 1998 एवं 1999 में खुद मायावती सांसद चुनी गयीं।

2002 में बसपा के ही त्रिभुवनदत्त को उपचुनाव में सफलता मिली तो 205 में सपा के संखलाल मांझी ने बसपा सीट छीन ली। लेकिन 2009 के लोकसभा चुनाव में बसपा के राकेश पाण्डेय ने सपा से सीट छीनकर उसे बसपा की झोली में डाल दिया। लेकिन वर्ष 2014 में होने जा रहे मतदान मे अम्बेडकरनगर संसदीय क्षेत्र की सियासी फिजा वदल चुकी है। बदलाव के मूड में नजर आ रहा मतदाता इस बार 7 मई 2014 को होने वाले मतदान में 55-अम्बेडकरनगर लोकसभा क्षेत्र में इतिहास रचने को आतुर दिखाई पड़ रहा है।

रिपोर्ट रीता विश्वकर्मा -अम्बेडकरनगर 

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