खंडवा का बलराम कैसे बन गया बॉलीवुड का कोरियोग्राफर जानी डिसूजा, संघर्ष की कहानी

खंडवा: तीन दादाओं के नाम से खंडवा जिले को पहचाना जाना जाता है जिले में ऐसी कई प्रतिभा निकली है जिन्होंने खंडवा का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। समाजसेवी व प्रवक्ता सुनील ने बताया कि धार्मिक क्षेत्र हो या खेल की छुपी हुई कोई प्रतिभा हो हमारे खंडवा का नाम रोशन किया है। मध्यप्रदेश के खंडवा जिले का नाम फिल्मी दुनिया में खंडवा में किशोर दा के नाम से फेमस है, लेकिन किसी ने सच ही कहा है दुनिया में असंभव कुछ भी नहीं है। इसांन चाहे तो वो सब कुछ कर सकता है जो वो सोचता है। कुछ ऐसा ही किया गणेश तलाई निवासी बलराम के हौसलों की उड़ान की संघर्ष भरी कहानी कैसे बना बलराम मुंबई बॉलीवुड का जानी डिसूजा। सन 1991 में अपनी जन्मभूमि से अपने सपनों को आंखों में लिए मुंबई महानगरी की ओर रुख किया।

एक अनजान शहर में ना कोई अपना ना कोई पराया संघर्ष ही जीवन का आधार बन गया। मुंबई में पहुंचने पर ना तो घर का ठिकाना था ना खाने का। रात फुटपाथ पर बीत जाती थी। 1991 से 1993 तक 3 वर्ष मुंबई में चंदन सिनेमा अजय देवगन के बंगले जुहू के सामने फुटपाथ पर रात बिता देता था। ऐसे ही मेरे संघर्ष भरे दिन बीतते चले गए। वर्ष 1993 में कोरियोग्राफर सरोज खान के असिस्टेंट भूपी से मुलाकात की। उनके द्वारा मुझे बॉलीवुड में प्रवेश का रास्ता का मार्गदर्शन मिला और नृत्य डांस की ट्रेनिंग की एवं परीक्षा पास कर बॉलीवुड का लाइफ़ टाइम कार्ड मिल गया और मुझे पहला ब्रेक रंगीला फिल्म में आमिर खान के साथ काम करने का मौका मिला। तब से लेकर आज तक करीब 700 से अधिक फिल्मों में डांस और अभिनय के तौर पर काम करने का मौका मिला जो आज तक जारी है।

अभी आने वाली फिल्म भीमा कोरेगांव जो कि अर्जुन रामपाल द्वारा बनाई जा रही है उसमें डांसर की भूमिका में नजर आऊंगा। जॉनी डिसूजा मुंबई का दिया हुआ नाम है। फिल्मों के साथ-साथ धारावाहिकों में भी काम करने का मौका मिला। विदाई, यह रिश्ता क्या कहलाता है, ससुराल गेंदा फूल सहित अन्य कई धारावाहिकों में काम किया। मैंने कभी जिन्दगी के संघर्ष के आगे घुटने नहीं टेके बल्कि अपनी मेहनत और लगन की बदौलत आज कोरियोग्राफिंग में मुंबई में अपना नाम बनाया। आग में तपकर ही सोना कुंदन बनता है और बलराम जॉनी डिसूजा वो कुंदन है जिन्होंने खुद को गरीबी और संघर्ष की आग में तपाकर ही निखारा है।

असफलताएं भी बलराम का रास्ता रोक नहीं पाईं। बलराम ने हार नहीं मानी और अपने हालातों के साथ संघर्ष करने लगे। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और बॉलीवुड में उन्हें जगह मिली और आज एक पहचान बन गई जॉनी डिसूजा के रूप में। जॉनी डिसूजा बताते हैं कि रियलिटी शो ने सही में बड़ी भूमिका निभाई है। लोग पहले इसे हॉबी के तौर पर लिया करते थे, पर अब वे इसे प्रोफेशन के तौर पर लेने लगे हैं। मार्केट भी इसे बतौर प्रोफेशन काफी बढ़ावा दे रहा है। ऐसे में देश में डांस का भविष्य बेहद उज्जवल है। सबसे पहला ब्रेक मुझे अनुभव कोरियोग्राफर सरोज खान के पीए ने दिया था और फिल्म रंगीला के बाद लोग मुझे पहचानने लगे। हिपहॉप, सालसा, क्लासिकल और फ्री स्टाइल डांस सिखाकर बॉलीवुड कोरियोग्राफर यह महसूस कर रहे हैं कि शहर में टैलेंट नहीं बल्कि बेहतर प्लेटफार्म की कमी है।

शहर के युवाओं और महिलाओं को अपनी रोजमर्रा के कामकाज के बाद भी डांस सीखने की ललक होती है। कहती हैं कि डांस अब धीरे-धीरे एक लाइफ टाइम प्रोफेशन के तौर पर सामने आ रहा है। पहले लोग इसे केवल कुछ समय का मनोरंजन समझते थे लेकिन उन्होंने स्वयं का उदाहरण देते हुए बताया कि धीरे-धीरे जागरूकता बढ़ रही है और लोग अपने बच्चों की प्रतिभा के अनुरूप उन्हें अपना भविष्य तय करने दे रहे हैं। यही कारण है कि लोगों का रूझान अब इस तरफ बढऩे लगा है। आज के युवाओं को यही कहना चाहूंगा कि माया नगरी मुंबई में जाने से पहले आप में कितना टैलेंट है यह जरूर देखें।

सपने हर कोई देखता है लेकिन उन सपनों को साकार करना बहुत बड़ी बात होती है। आज के युवा कड़ी मेहनत और संघर्ष के साथ निरंतर अभ्यास करें तभी आपको सफलता मिलेगी। खंडवा के समाजसेवी सुनील जैन बताया कि ऐसी ही प्रतिभाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खंडवा जिले का नाम रोशन करती है जिसमें इच्छाशक्ति भरपूर हो उन्हीं में से एक है जॉनी डिसूजा। खंडवा लौटने पर शनिवार को किशोर सांस्कृतिक प्रेरणा मंच के सचिव नारायण बाहेती, समाजसेवी व प्रवक्ता सुनील जैन उनके मित्र चेतन गोहर ने शाल श्रीफल भेंट पुष्पमाला से खंडवा के बलराम का स्वागत किया।