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डेयरी व्यवसाय में कैरियर , प्रशिक्षण संस्थान

Career in  dairy business

डेयरी कारखानों में दूध तथा उसमे निर्मित होने वाले विभिन्न उत्पादों के निर्माण प्राधिकरण आदि अनेक वैधानिक प्रक्रियाओं मे डेयरी टेव्नहृोलाजी की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है यह फर्म कार्यकुशल तथा प्रशिक्षित व्यक्तियों द्वारा किया जाता है जिन्हें डेयरी टेव्नहृोलाजिस्ट कहा जाता है।

डेयरी कारखानों में सामान्यतः उन्हीं युवाओं को नियुक्तियां दी जाती हैं जो इस विधा में बकायदा डिग्री अथवा डिप्लोमाधारी होते है । डेयरी टेव्नहृोलोजी में आज स्नातक तथा पीएचडी तक की शिक्षा की व्यवस्था होने के कारण इस क्षेत्र में प्रगति व उन्नति की भी अपार संभावनाएं हैं।

जो युवक-युवतियां, इंटरमीडिएट अथवा 10 +2  विज्ञान संकाय से न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक सहित उत्तीर्ण हैं, वे डेयरी टेव्नहृोलाजी पाठ्यक्रम में प्रवेश की पात्रता रखते है। राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, करनाल (हरियाणा) तथा डेयरी साइंस इंस्टीट्यूट, मुंबई द्वारा दो साल की अवधि का डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित किया जाता है।

डेयरी टेव्नहृोलाजी में डिग्री पाठ्क्रम (बीएससी या बीटेक) चार साल की अवधि का है। इस पाठ्यक्रम में शैक्षिक आर्हता सामान्यतः डिप्लोमा पाठ्यक्रम के समकक्ष होती है। कुछ शैक्षिक संस्थान पाठ्यक्रम की अवधि तथा निर्धारित न्यूनतम अंकों का प्रतिशत अलग-अलग भी रखते है। मसलन संजय गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेयरी साइंस एंड टेव्नहृोलोजी, पूना में डिग्री पाठ्यक्रम की अवधि पांच वर्ष की है। इस संस्थान में उन्हीं अभ्यार्थियों को प्रवेश दिया जाता है जो 55 फीसदी अंकों के साथ 10 +2 अथवा इंटरमीडिएट कर चुके है। साथ ही उन्होंने विषयों के रूप में भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणित आदि संकाय में अध्ययन किया हो।

इसी प्रकार उदयपुर (राजस्थान) स्थित कालेज आफ डेयरी साइंस भी पांच वर्षीय डिग्री पाठ्यक्रम संचालित करता है। इस संस्थान की शैक्षिक आर्हताएं संजय गांधी संस्थान के समान हैं जबकि सेठ एमसी कालेज ऑफ डेयरी साइंस, आनंद (गुजरात) तथा विटनरी कालेज हव्वल (कर्नाटक) में साढे चार साल की अवधि का डिग्री पाठ्क्रम चलाया जाता है। यही नहीं कालेज ऑफ डेयरी टेव्नहृोलोजी, रायपुर (मध्यप्रदेश) एवं फैकल्टी ऑफ विटनरी साइंस एनीमल, हस्बंैडरी, नादिया (पश्चिम बंगाल) चार वर्षीय डिग्री पाठ्यक्रम संचालित करता है।

इन संस्थानों में प्रवेश संबधी सूचनाएं देश के समस्त अखबारों एवं रोजगार संबंधी बुलेटिनों में प्रतिवर्ष मार्च-अप्रैल में प्रकाशित की जाती है। सामान्यतः जून-जुलाई में समस्त प्रतिष्ठित संस्थान राष्ट्रीय स्तर पर प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करते है। प्रवेश परीक्षाएं तीन प्रकार के प्रश्न पत्रों पर आधारित होती है। प्रथम प्रश्न पत्र में भौतिक, रसायन विज्ञान तथा गणित, द्वितीय प्रश्न पत्र में अंग्रेजी तथा तृतीय प्रश्नपत्र में सामान्य ज्ञाने से जुड़े सवाल पूछे जाते है। इन समस्त प्रश्नपत्रों का स्तर इंटरमीडिएट के समकक्ष होता है।

विज्ञान स्नातकों तथा व्यसायिक डिग्रीधारकों के लिए डेयरी टेव्नहृोलाजी में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम (एमएससी) की भी व्यवस्था है। माइक्रोबायोलाजी, डेयरी कैमिस्ट्री, डेयरी टेव्नहृोलाजी एनीमल बायोकैमिस्ट्री, डेयरी इकोनोमिक्स, डेयरी इंजीनियरिंग तथा बायोटेव्नहृोलोजी में न्यूनतम 55 फीसदी अंकों के साथ उत्तीर्ण छात्र-छात्राएं इस पाठ्यक्रम में प्रवेश की पात्रता रखते है।कुछ व्यवसायिक डिग्रियों जैसे कृषि वैटनरी साइंस, एनीमल हस्बैंडी, होम साइंस, पूहृड टेव्नहृोलाजी आदि विषयों में स्नातक उत्तीर्ण अम्यर्थी भी एमएससी कर सकते है।

डेयरी टेव्नहृोलाजी में प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने वाले युवक-युवतियों को डेयरी इंजीनियरिंग, डेयरी कैमिस्ट्री, डेयरी वैक्टीरियोलाजी, माइक्रोबायालाजिक लेबोरेटरी टेस्टिंग, स्टेटिस्कटल क्वालिटी कंट्रोल आदि के अंतर्गत अध्ययन कराया जाता है। यही नहीं प्रशिक्षुओं को दुग्ध संयंत्र स्थापित करने से लेकर संचालन प्रावधान, लेखांकन आदि की विस्तृत जानकारी भी प्रदान की जाती है।

व्यवहारिक अनुभव के लिए प्रशिक्षुओं को कार्य प्रशिक्षण हेतु भी भेजे जाने का प्रावधान है। इस प्रकार की तकनीकी शिक्षा अर्जित कर चुके युवाओं को बैंक आदि से ऋण सुविधाएं भी मिल रही हैं जिससे वह अपना खुद का करोबार स्थापित करने के साथ-साथ अन्य बेरोजगार साथियों का भी भला कर सकते है।

प्रशिक्षण संस्थान
राष्टतय डेयरी अनुसंधान संस्थान, करनाल
हरियाणा।
आंध्रप्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, राजेंद्रनगर
हैदराबाद (आंध्रप्रदेश)।
डेयरी साइंस इंस्टीट्यूट, मिल्क कालोनी
मुंबई।
वैटनरी कालेज, हव्वल (कर्नाटक)
कालेज ऑफ डेयरी साइंस उदयपुर
(राजस्थान)।
गुजरात कृषि विश्वविद्यालय, कृषि नगर
वनासकांठा गुजरात।
फैकल्टी आफ वैनटरी साइंस एंड एनील हस्बैंडरी कृषि विश्वविद्यालय, नादिया (पश्चिम बंगाल)
कालेज ऑफ डेयरी टेव्नहृोलाजी, कृषक नगर, लुभंडी, रामपुर (मध्यप्रदेश)।

 

 

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