Home > Hindu > सनातन धर्म की रक्षा के लिए हिंग्लाज सेना का गठन

सनातन धर्म की रक्षा के लिए हिंग्लाज सेना का गठन

Shankaracharya

सिवनी [ TNN ] शंकराचार्य महाराज श्री ने धर्मादेश देकर शास्त्र सम्मत दिशा बोध कराया है। धर्मादेश के परिपालन में, सनातन समाज को धर्म के अनुकूल एवं नशा मुक्त दिशा देने। मातृशक्ति कृत्संकल्पित और एकजुट हुई है। उक्ताशय की जारी प्रेस विज्ञप्ति में महिला हिंग्लाज सेना नगर संयोजक श्रीमती गीता अवस्थी ने बताया कि हिंग्लाज सेना राष्ट्रीय अध्यक्ष दीदी लक्ष्मीमणी शास्त्री के मार्गदर्शन में नगर की जागरूक महिलाओं को हिंग्लाज सेना से जोडऩे सघन संपर्क अभियान जारी है।

सनातन धर्म की रक्षा, प्रचार-प्रसार एवं सामाजिक बुराइयों के प्रति जागृति लाने के पवित्र उदेश्य से महाराज श्री की भावना के अनुरूप हिंग्लाज सेना का गठन किया गया है। शंकराचार्य की जन्म-स्थली सिवनी जिले की जनता मूलत: धर्मपरायण है एवं हजारों की संख्या में शिष्य अनुयायि हैं।

विगत ९ जुलाई को, पूज्य शंकराचार्य स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के पावन सानिध्य में सिवनी में संपन्न विशाल धर्म -सभा में हिंग्लाज सेना से जुड़ी सैंकड़ो महिलाऐं पंहुची थी। सहज सरल समातन धर्मियों की सहिष्णुता का लाभ उठाकर, सांई बाबा को विष्णु अवतार भगवान के रूप में प्रचारित करने एवं मनगढंत फिल्मी कहानियां साहित्य रचकर धर्मपरायण जनता का भावनात्मक शोषण करने की सच्चाई महाराज श्री से सुनकर सिवनी की जनता सजग हुई है। जनता को गुमराह करके धर्म भ्रष्ट बनानें वाले तथाकथित भगवान और उसके मंदिर व पुलाव प्रसाद से बचने का महाराज श्री ने जनता को सावधान किया है।

सनातन धर्म की रक्षा की रक्षा और इसकी पवित्रता बनाये रखने हेतु जनता को चमत्कार के पाखंड से दूर रहने महाराज श्री ने स्पष्ट धर्मादेश दिया है। एक अरब छिआनवे करोड़ ८ लाख ५३ हजार ११०साल (१,९६,०५८३११०वर्ष)पुराना हमारा सनातन धर्म का उदय किसी एक पैगम्बर या गुरू की शिक्षा से नहीं हुआ है, बल्कि मानव सभ्यता के प्रारंभ से ही ऋषि मनीषियों के सामूहिक विवेक और प्रेरणा, उदगारों से रचित वेदो पर आधारित है। वेदो को पढ़कर या वेदपाठी संत महात्माओं को सुनकर उन्हें अपनी जीवन शैली में ढालने वाला ही हिन्दू कहलाता है।

नवगठित महिला हिंग्लाज सेना अपनी बैठकों रामायण मंडली, भजन मंडलों, के आयोजन में सम्मलित होकर धार्मिक भ्रांतियों को दूर करने सक्रिय हैं,साथ ही समाज में फैली नशाखोरी, शराब की बुराइयों का प्रतिकार करने वैचारिक क्रं ाति अभियान चलाने एकजुट हैं। श्रीमती गीता अवस्थी ने बताया कि गुमराह होकर धर्म भ्रष्ट कार्यों में शामिल नर-नारी अब आपसी चर्चा में कह रहें कि इससे पहले अनजाने में जो अधर्म हुआ है अब ईश्वर से क्षमापूर्वक प्रार्थना कर सत्य सनातन मार्ग पर ही चलेेंगे । माता को प्रथम गुरू कहा गया है जो परिवार की धुरी होती हैं, और संस्कारों की जननी हैं।

महिला जागृति आभियान में सर्वश्री श्रीमती रागिनी तिवरी अध्यक्ष आदर्श महिला मंडल, हेमलता तिवारी, अर्पणा दुबे, रीता मिश्रा, आरती मिश्रा,श्रीमती आशा सनोडिय़ा, सरिता मिश्रा, प्रतिभा साहू, अनीता अवस्थी, चंद्रलता तिवारी, रेणु पाण्डे, मधु तिवारी, स्वर्णलता तिवारी, ज्योति तिवारी प्रीति दुबे, मंजु मिश्रा , सीमा कौशिक , किरण बघेल, राधा सनोडिय़ा, लता तिवारी, प्रतिभा ठाकरे, सरिता तिवारी, लता सनोडिय़ा, कमला दुबे, मंजु सनोडिय़ा, कुमुद पाण्डे, समता दुबे, निर्मला तिवारी, सुनीता दुबे, श्रद्धा मिश्रा, कुमारी मृदुला तिवारी , कु. निहारिका अवस्थी ,कु. गरिमा तिवारी, सहित अन्य जागरूक महिलाओं का सक्रिय योगदान प्राप्त हो रहा हैं।

कर पदाघात अब मिथ्या के मस्तक पर ,सत्यान्वेषण के पथ पर निकलो नारी ।
तुम बहुत दिनों तक बनी द्वीप कुटिया का , अब बनो क्रांति ज्वाला की चिंगारी ।।

रिपोर्ट – मनोज मर्दन त्रिवेदी

Copyright @teznews.com. Designed by Lemosys.com