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इन्दिरा : आयरन लेडी ऑफ इंडिया – जन्मदिवस पर विशेष

Indira Gandhi

दुर्भाग्यवश 31 अक्टूबर 1984 को उनके अपने ही बॉडीगार्ड (अंगरक्षकों) ने श्रीमती इन्दिरा गांधी को उनके सरकारी आवास एक सफदरजंग रोड नईदिल्ली में गोली मार दी थी। घटना के समय प्रधानमंत्री श्रीमती गांधी की उम्र अपने 67 वें जन्मदिन से मात्र 19 दिन कम थी। श्रीमती गांधी से यह प्रतिशोध ’गोल्डनटेम्पल’(स्वर्णमंदिर) अमृतसर में आतंकवादियों को बाहर खदेड़ने एवं उग्रवादी गति विधियों से मन्दिर को मुक्त कराने की प्रतिक्रिया स्वरुप लिया गया था। इस हत्या से पूरा देश स्त्बध था। 

श्रीमती गांधी ने भारत के पांचवे एवं आठवे छठे प्रधानमंत्री के रुप में देश का नेतृत्व किया। पहली बार 19 जनवरी 1966 को तीसरे प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री के निधन के बाद चैथे अन्तरिम प्रधानमंत्री गुलजारी लाल नन्दा से कार्यभार ग्रहण किया था। इस पद पर वह 24 मार्च 1977 तक रहीं थी। पुनः 14,15 जनवरी 1980 को जनता पार्टी के पतन के बाद मोरारजी देसाई सत्ताच्युत हुए थे तब कांग्रेस थी सत्ता में वापसी श्रीमती गांधी के आठवे प्रधानमंत्री के रुप में वह मृत्यु पर्यन्त इस पद पर रहीं। उनकी हत्या के बाद प्रधानमंत्री का पद उनके बेटे राजीव गांधी ने संभाला। जिनकी बाद में लिट्टे उग्रवादियों ने हत्या कर दी थी। 

श्रीमती गांधी आजाद भारत की एक ऐसी महाननेता थी जो एक प्रधानमंत्री की बेटी, खुद प्रधानमंत्री और प्रधानमंत्री(राजीव गांधी) की मां भी थी। उनका सरनेम(उपनाम)’गांधी’ जरुर था। परन्तु महात्मा गांधी से उनका दूर-दूर तक कोई रिश्ता नहीं था। उनका पूरा नाम इन्दिरा प्रियदर्शनी नेहरु था।
नेहरु परिवार के पूर्वज जम्मू कश्मीर के ब्राम्हण थे। उनके परदादा गंगाधर कौल दिल्ली मेें आ गए थे। वह बड़े ओहदेदार थें। उनके दादा आगरा से इलाहाबाद जा बसे थें और वहॉ के मशहूर प्रभावशाली वकील बन गए थे। मोतीलाल नेहरु भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख व असरदार नेता थे। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में उनका भारी योगदान था। नेहरु कमेटी रिपोर्ट में उन्होंने भारतीय शासन व्यवस्था में सुधारों की बात की थी। श्रीमती गांधी के पिता पंडित जवाहरलाल नेहरु, पाश्चात्य प्रभाव के शिक्षित एवं लोकप्रिय नेता थे। जवाहरलाल नेहरु की पत्नी श्रीमती कमला नेहरु की कोख से 19 नवंबर 1917 को इलाहाबाद में इन्दिरा का जन्म हुआ इन्दिरा का ननिहाल दिल्ली था। 

इन्दिरा नेहरु जिन्हें घर में प्यार से इन्दू कहते थे, अपनी मॉ की निगरानी में थी पिता एवं दादा कभी व्यस्त तो कभी जेल मे रहते स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी व्यस्तता ने इन्दु को अकेला बना दिया था एकाकीपन उनके बचपन का एक हिस्सा बन गया था। अपनी बुआ श्रीमती विजयलक्ष्मी पंडित एवं अन्य से भी उन्हें कभी वह स्नेह व प्यार नहीं मिला लगातार पारिवारिक तनाव का प्रभाव बाद में उनकी राजनीति में परिलक्षित हुआ।
इन्दिराजी ने मात्र 10-12 साल की उम्र में कांग्रेस में बच्चों की वानर सेना(मंकीआर्मी) का गठन कर कई महत्वपूर्ण कार्यो को संपन्न किया जो उस समय कांग्रेस के युवक और वरिष्ठ नेता नहीं कर सकते थे। गुप्त संदेश पत्र तथा दस्तावेज इधर उधर पहँुचाने का काम बच्चे बिना शकके ब्रिटिश सिपाहियों की आंखों में धूल झोंककर पूरे कर लेते थें। 1930 तक कई क्रांतिकारी गतिविधियों में वानर सेना ने खूब मदद की।

1934 में इन्दिराजी की मां श्रीमती कमला नेहरु को टी बी (क्षय रोग) ने पूरी तरह से जकड़ लिया था इन्दिरा भी स्कूली शिक्षा कभी ढंग से नहीं हुई थी। घर का वातावरण मां की बीमारी 15-16 साल की यह अकेली लड़की इन समस्याओं से अकेले जूझ रही थी। भारतीय, यूरोपीय व ब्रिटिश स्कूलों में पढ़ाई तो हुई पर कहीं भी ढंग से वह पढ़ नहीें पाई। शाति निकेतन विश्वविद्यालय हो या ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी उनकी आकस्मिक कमजोरी आड़े आई और वह कहीं से भी डिग्री हासिल नहीं कर सकीं।

यूरोप एवं इग्लैंड में मां के इलाज के लिए जाना पड़ा वहीं उनकी मुलाकात मध्य वर्गीय पारसी लड़के फिरोज जहांगीर गांधी से हुई। वह कांग्रेस के सक्रिय युवा कार्यकर्ता थें। मां की बीमारी के दौरान दोनों में घनिष्ठिता बढ़ी 1936 में इन्दिरा पर मां का साया भी नहीं रहा-उनकी टीवी से मौत हो गई। इन्दिरा एकदम अकेली रह गयी। 1938 में इन्दिरा ने अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी की सक्रिय सदस्यता ले ली। और 1942 में उनका विवाह पत्रकार फिरोजगांधी के साथ आनन्द भवन में संपन्न करा दिया गया। तब से उनके नाम के साथ गांधी शब्द जुड़ गया। 

विवाह के कुछ दिन बाद ब्रिटिश कानून तोड़ने के कारण फिरोज और इन्दिरा दोनों को गिरफ्तार नैनी सैन्ट्रल जेल में डाल दिया गया। सितंबर 11, 1942 से 13 मई 1943 तक दोनों जेल में रहे। 1944 में उन्होंने राजीव गांधी को जन्म दिया और दो साल बाद संजय का जन्म हुआ। 1947 में देश आजाद हुआ देश का बंटवारा हुआ। पाकिस्तान नया देश बना धर्म के आधार पर हिन्दू मुसलमानों की अदला बदली हुई। फिरोज व इन्दिरा दोनों ने रिफ्यूजी केम्प में अनेक शरणार्थी परिवारों की रात-दिन मदद की। श्रीमती गांधी ने जनसेवा का भारी काम सरेअंजाम दिया।

इलाहाबाद में रहकर फिरोजगांधी कांग्रेस अखबार में पत्रकारिता करते थें और साथ इन्श्योरेन्स का काम भी करते थें। इस बीच जवाहर लाल नेहरु देश के पहले प्रधानमंत्री बने तो उन्हें दिल्ली रहना पड़ा। इन्दिरा व फिरोज के वैवाहिक जीवन मेें इन दूरियो से खटास आने लगी। इन्दिरा अपने अकेले पिता विश्वास पात्र के रुप में उनकी मदद करने लगी। बच्चें भी इन्दिरा के साथ थे। विवाहित बने रहने पर भी फिरोज व इन्दिरा पूर्णतया अलग-2 हो गए थे।

1951 में भारत के पहले चुनाव की घोषणा हुई। इन्दिरा गांधी ने अपने चुनाव मे ंपिता की सहायता थी। बिना नेहरु जी से पूछे फिरोज गांधी ने भी राय बरेली के चुनाव लड़ा और जीत गए। लोकसभा मेम्बर बनकर फिरोज जब दिल्ली आए तो उन्होंने अपनी ससुराल में रहने की बजाय अलग मकान लेकर रहना पसंद किया। फिरोज जल्दी ही मशहूर पत्रकार और सांसद बन गए उन्होंने भ्रष्टचार के मुद्दो पर अनेक काण्डो को खुलासा किया इन्श्योरेन्स घोटाला उनका चर्चित है जिसमें नेहरुजी के सहयोगी वित्तमंत्री को इस्तीफा देना पड़ा था। तनाव बढ गया था। इन्दिरा व फिरोज अब पूर्णतया अलग हो चुके थे। फिरोज दूसरे आमचुनाव में पुनःजीत गए थें परन्तु 1958 में उन्हें दिल का दौरा पड़ा उनके टूटे वैवाहिक जीवन के पुनः पटरी पर आने के आसार बनते नजर आ रहे थे इस बीच 8 सितंबर 1960 को जब श्रीमती गांधी अपने पिता प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु के साथ विदेश यात्रा पर गई हुई थी तो फिरोजगांधी की मौत हो गई। उनके बड़े पुत्र राजीवगांधी ने उनकी चिता में आग दी थी बाद मे उनकी अस्थियो को पारसी शव गृह(इलाहाबाद) में समाधि मे ंरखी गयी थी।

1959-60 में श्रीमती गांधी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष चुनी गयी। 27 मई 1964 को नेहरु जी का स्वर्गवास हो गया। कार्यवाहक प्रधानमंत्री गुलजारीनंदा बने बाद में सर्वसम्मति से लाल बहादुर शास्त्री को प्रधान मंत्री पद की शपथ दिलाई गयी। मद्रास में हिन्दी विरोधी आंदोलन से 1965 के भारत-पाक युद्ध की रेडियो टीवी मीडिया से कवरेज श्रीमती गांधी के नेतृत्व में बेहतर ढंग से हुई। भारत पाकिस्तान को पछाड़ चुका था सोवियतसंघ के दबाव मे शास्त्री ने पाक राष्ट्रपति अय्यूब खां से ताशकंद में समझौता किया और चन्द घन्टे बाद वहीं पर ही उनकी मौत हो गई। 

श्री शास्त्री की मौत के बाद पुनः गुलजारी नंदा कार्यवाहक प्रधानमंत्री बनें इस पद के लिए मोरारजी देसाई प्रबल दावेदार थे। अपने कट्टर जिद्दी कार्यशैली के लिए ख्यात कांग्रेस के वरिष्ठ सिन्डीकेट नेताओं कुमार स्वामी कामराज एवं अन्य ने श्रीमती गांधी को प्रधानमंत्री बनाने पर पक्षयह सोचकर लिया कि यह मोम कि गुडि़या हमारे इशारों पर नाचेगी और वह मोरार जी पर भारी पड़ेगे पर उन्हें क्या पता था कि यह इन्डिया की आइरन लेडी साबित होगी। पद पर कड़ा मुकाबला हुआ सिडीकेट की सहायता से श्रीमती गांधी के पक्ष 355 वा मोरारजी को 169 वोट मिले थे। श्रीमती गांधी भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री चुनी गयी। 

हरितक्रांति, गरीबी हटाओं, बैक राष्ट्रीयकरण जैसे अनेक मुद्दो पर श्रीमती गांधी ने साहस का परिचय 1971 में युद्ध के दौरान अमेरिका ने पूर्वी पाक में अपना सातवा बडा भेजा था इन्दिराजी ने साहस दिखा दुनिया का सबसे बड़ा आर्मी सरेन्डर जगतजीत सिंह अरोड़ा के नेतृत्व पाकिस्तान की सेना की जनरल नियाजी द्वारा आत्म समर्पण कराकर बंगलादेश का निर्माण कराया। परमाणु विस्फोट, सुरक्षा विदेश नीति पर कश्मीर मसला, शिमला समझौता श्रीमती गांधी भी महान उपलब्धियों में हैं। 1974 में पोखरण परमाणु विस्फोट और देश मे ें1975 में इलाहाबाद हाईकोर्ट मेें चुनावी मुकदमा हारने के 26जून 1975 के बाद इमरजेन्सी लगाकर 1977 तक एक छत्र राज्य किया। इमरजेन्सी से खफालोग ने अगले चुनाव मेें इन्दिराजी को सत्ता से बाहर का दरवाजा दिखा दिया।

मोरारजी के नेतृत्व में जनता पार्टी सत्ता में आई इसे कृपलानी और जयप्रकाश जी का आर्शीवाद प्राप्त था पर जल्दी ही यह आर एस एस तथा अपनी कार्यप्रणाली के चलते दो साल के बिखर गई। पुनः श्रीमती गांधी व कांग्रेस सत्ता में आई। तस्वीर बदल चुकी थी। आतंकवादी पॅठ चूका था अनुशासनहीनता बढ चुकी थी संजय गांधी का वर्चस्व था परन्तु उनकी विमान दुर्घटना में मौत हो गई। राजीव मां के दबाव में राजनीति में आए। पंजाब समस्या का आतंकवाद श्रीमती गांधी थी मौत का कारण बना और यह आइरन लेडी ऑफ इन्डिया की कुर्बानी लोकतंत्र की मजबूती में मील का पत्थर साबित हुई श्रीमती गांधी का जिस्म गोलियां से छलनी हो गया पर हिन्दुस्तान सलामत रहा उसे टूटने नहीं दिया उनके जन्म दिवस पर सेक्यूलर विचार धारा के लोगों की ओर से हेप्पी बर्थ डे ’’टू आयरन लेंडी इन्दिरा ऑफ इन्डिया।’’

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