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आईएएस अफसर के दावे में हैं कितना दम,मांगी जानकारी

भोपाल : आईएएस अफसर दीपाली रस्तोगी के दावों में कितनी सच्चाई है। इसके लिए मुख्य सचिव बीपी सिंह ने सामान्य प्रशासन विभाग से ऐसे आईएएस अफसरों की सूची मांगी है, जिनके बच्चे विदेश में पढ़ रहे हैं। हालांकि मुख्य सचिव के इन निर्देशों को विभागीय प्रक्रिया (कागजी) से दूर रखा गया है। रस्तोगी ने दावा किया था कि आईएएस अफसरों के बच्चे विदेश में पढ़ रहे हैं। इसलिए सरकारी स्कूलों की स्थिति नहीं सुधर रही।

यह है मामला
रस्तोगी ने हाल ही में एक अंग्रेजी अखबार के लिए ‘द फिलॉसाफी ऑफ पॉवर एंड प्रेस्टीज” शीर्षक से लेख लिखा है। इसमें आला प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली को सवालों के घेरे में खड़ा किया है। उन्होंने लिखा है कि ‘हम गर्व से कहते हैं कि लोक सेवा करते हैं। हकीकत में दिखावा ज्यादा करते हैं। वास्तव में देश से कोई लगाव नहीं है। बच्चे विदेश में पढ़ रहे हैं, लग्जरी जीवन जी रहे हैं।” ऐसा लिखकर रस्तोगी ने सरकारी स्कूल व्यवस्था पर कटाक्ष किया है।

रस्तोगी वर्तमान में जनजातीय कार्य विभाग की आयुक्त हैं। इससे पहले वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकता वाले स्वच्छता मिशन पर लेख लिखकर विवादों में घिर चुकी हैं। मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि आईएएस अफसरों की कार्यप्रणाली को लेकर अंग्रेजी अखबार में लेख छपने के बाद मुख्य सचिव ने सामान्य प्रशासन विभाग के अफसरों से जानना चाहा है कि प्रदेश के कितने अफसरों के बच्चे विदेश में पढ़ रहे हैं।

इसे लेकर विभाग ने प्रारंभिक जानकारी मुख्य सचिव को उपलब्ध भी करा दी है। जिसमें विदेश में बच्चों को पढ़ाने वाले आईएएस अफसरों की संख्या एक दर्जन से भी कम बताई गई है। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग के अफसर कुछ भी बताने को तैयार नहीं हैं। वे सिर्फ इतना कहते हैं कि यह नितांत व्यक्तिगत जानकारी है। इसलिए कोई नहीं पूछता है और लेख में यह सिर्फ प्रदेश के संदर्भ में नहीं कहा गया है।

 

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