Home > India News > यहाँ बढ़ रहा खून का व्यापार

यहाँ बढ़ रहा खून का व्यापार

कौशाम्बी : खून के सौदागर जिले में मौत का खुला खेल खेल रहे हैं। नशेड़ी व अन्य प्रकार के नशेबाजों से लेकर गंभीर बीमारियों से ग्रसित लोगों का खून खरीदकर सरेआम बेचा जा रहा है। कई पैथोलाजी के संचालक इस कार्य में लिप्त हैं। इन नशेड़ी और गरीबों से दो सौ- ढाई सौ रुपये प्रति बोतल खून लिया जाता है जबकि मरीजों को यही खून आठ सौ से लेकर एक हजार रुपये में दिया जाता है व जरूरत के मुताबिक कीमत हजारों में भी तब्दील हो जाती है । खून खरीदते समय इसकी जांच भी नहीं की जाती। इस मामले की जानकारी संबंधित अधिक्कारीयों को है लेकिन आज तक इसकी रोक थाम के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गयी।

बताते चलें कि वर्ष में औसतन सात सौ – एक हजार सड़क दुर्घटना हो जाती है। जिसमे लगभग चार सौ से पाँच सौ लोग मौत के शिकार भी बनते हैं और हजारों लोग घायल होते हैं। इनमें से 20 प्रतिशत लोगों को खून की जरूरत पड़ जाती है। इसके अतिरिक्त तमाम आपरेशन में एनीमीया आदि के मरीजों को भी खून की जरूरत पड़ती है। जिले में सरकारी अस्पताल का एक ब्लड बैंक है। ऐसे में खून की कमी बारहों महीने रहती है। जिला अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में खून उसी को मिलता है, जो बदले में खून देता है। बहुत से ऐसे मरीज होते हैं, जो खून का आदान-प्रदान नहीं कर पाते। ऐसे में लोगों को अवैध रूप से खून का व्यापार कर रहे सौदागरों की शरण में जाना पड़ता है।

खून के नाम पर मौत का खेल खेल रहे हैं ये सौदागर चंद नोटों के लिये न कि केवल अपनी जमीर को बेच दिये हैं, बल्कि इन्हें लोगों की जिन्दगी से भी कोई लेनादेना नहीं है। खून के इस व्यापार में जुटे लोग गंजेड़ी, अफीमची, हेरोइनबाज, ड्रगिस्ट, स्मैकी एवं विभिन्न बीमारियों से ग्रसित गरीबों का खून दो सौ से ढाई सौ रुपये बोतल खरीदते हैं। नशेड़ी नशे की जरूरत को पूरा करने के लिये तथा गरीब अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये खून बेचता है। जिसकी खून लेते समय जांच नहीं की जाती है। अच्छे खून के साथ ही संक्रमित खून सैकड़ों के दाम से लेकर हजारों रुपये में प्रति बोतल जरूरतमंदों को बेचा जाता है। इससे खून के व्यवसाय से जुड़े लोग तो मालामाल हो रहे हैं लेकिन संक्रमित खून चढ़वाने वाला तमाम बीमारियों का शिकार हो रहा है। ऐसे गंभीर मामले में प्रशासनिक अधिकारियों ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। परिणाम है कि यह व्यापार धड़ल्ले से फल-फूल रहा है।

कई पैथालाजिस्ट इसमें लिप्त हैं। न इन्हें विभाग का खौफ है और ना ही प्रशासन का डर। चर्चा तो यह भी है कि इस व्यवसाय से जुड़े लोग खून लिखने वाले डाक्टर से लेकर सम्बन्धित अधिकारी तक कमीशन पहुंचाते हैं जिसके कारण इनके विरुद्ध कार्रवाई नहीं होती। इस गम्भीर समस्या पर हर बार संबंधित विभागीय अधिकारी रटा रटाया एक ही जवाब देते हैं कि यदि शिकायत मिलती है, तो खून का अवैध व्यापार करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जायेगी। वैसे लोगों को सरकारी ब्लड बैंक से आदान-प्रदान के माध्यम से खून प्राप्त करना चाहिये। आखिरकार न जाने कब ये खूनी खेल बन्द होगा जिससे अमानक खून चढ़ाने से लोगों की जान बच सके । मामला तो यहां तक भी है कि शहर स्थिति पैथलॉजियो में हर सुबह व शाम ऐसे खून की खेप उठाने वाले लोग ऐसी हुलिया बनाकर आते हैं और हाँथ में लिए झोले के बंदर ब्लड पैकेट भरकर ले जाते हैं कि जिन्हें हम आप पागल या बेहद गरीब समझकर उनके द्वारा कोई भी आपराधिक कार्य करने की सोंच भी नहीं सकते हैं व ऐसे लोगों का झोला देखकर ये अनुमान भी कोई नहीं लगा सकता है कि इस झोले से खून के पैकेट की खेप ढोई जा रही है ।

अगर सूत्रों की मानें तो इस खेल में कोई आम आदमी नहीं बल्कि रसूखदार या अन्य लोग जो प्रशासन के साथ मिलकर काम करने वाले लोग ही सरगना हैं जो धड़ल्ले से ये खूनी व्यापार कर लोगों को मौत बांटने का काम कर रहे हैं । कमोबेस यही स्थित शहर के अलावा समूचे जिले में संचालित हो रही पैथलॉजियो से खून का व्यापार कर हर पैथोलॉजी संचालक अपनी जेब भरने का काम कर रहे हैं ।

रिपोर्ट @ इश्तियाक अहमद

Our News Network and website neither have any collaboration and connection directly nor indirectly with “India Today Group/ITG” ,TV Today Network, Channel Tez TV media group .