43.1 C
Indore
Thursday, May 23, 2024

राष्ट्र का मुखिया प्रधानमंत्री होता है चौकीदार नहीं


इन दिनों देश के चुनावी वातावरण में पक्ष तथा विपक्ष दोनों के ही द्वारा ‘चौकीदार’ शब्द के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। कभी प्रधानमंत्री ने अपने भाषणों के दौरान देश की आम जनता या यूं कहें कि कामगारों से जुडऩे के लिए स्वयं को प्रधान सेवक कहा तो कभी अपने-आप को देश का चौकीदार बता डाला। आगे चलकर जब राफेल विमान खरीद में कथित घोटाले की बातें सामने आईं तो विपक्ष ने प्रधानमंत्री के चौकीदार बनने पर न केवल सवाल उठाया बल्कि उनके विरुद्ध ‘चौकीदार चोर है’ नाम से एक राष्ट्रव्यापी मुहिम भी छेड़ डाली। ज़ाहिर है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी अपने ऊपर लगने वाले इस अप्रत्याशित आरोप का मुकाबला करना है।

लिहाज़ा उन्होंने व उनकी भारतीय जनता पार्टी ने ‘चौकीदार चोर है’ के इशारे को नरेंद्र मोदी की ओर से हटाने की गरज़ से ‘मैं भी चौकीदार’ नामक एक मुहिम छेड़ दी। इस मुहिम में भाजपा के समस्त नेता,कार्यकर्ता तथा उनके समर्थक धीरे-धीरे जुड़ते जा रहे हैं और अपने नाम के साथ चौकीदार शब्द लगा रहे हैं।

मज़े की बात तो यह है कि ‘मैं भी चौकीदार’ के अभियान में कुछ ऐसे लोग भी नरेंद्र मोदी के समर्थन में स्वयं को चौकीदार बता रहे हैं जिनसे न कोई चौकीदारी करवाना पसंद करेगा न ही ऐसे चौकीदारों पर कोई कभी भरोसा कर सकता है। ऐसे ही एक नए-नवेले मोदी भक्त चौकीदार बने हैं एमजे अकबर। जनता शायद अभी ‘मी टू’ अभियान में एमजे अकबर के पर्दाफाश हुए उन एैयाशी भरे कारनामों को नहीं भूली होगी जिसके चलते उन्हें स्वयं प्रधानमंत्री द्वारा अपने मंत्रिमंडल से बाहर निकाला गया था। ऐसे और भी अनेक अपराधी व आरोपी किस्म के लोग धीरे-धीरे ‘चौकीदार’ बनते जा रहे हैं।

सवाल यह है कि चुनाव के समय देश के मतदाताओं का जनसरोकार से जुड़े मुद्दों से ध्यान भटकाने का यह कैसा अभद्र तरीका है? जब देश की विधानसभा व लोकसभा के निर्वाचित सदस्यों को ‘माननीय’ कहकर संबोधित किया जाता हो ऐसे में यदि देश का प्रधानमंत्री स्वयं ही अपने पद के अर्थ व उसकी गरिमा व मान-स मान की रक्षा करने के बजाए उस पद को चौकीदार जैसे शब्द से संबोधित करने लगे ऐसे में विश्वस्तर पर प्रधानमंत्री पद की छवि आखिर कैसी बनेगी?

और यदि वे स्वयं को प्रधानमंत्री नहीं बल्कि चौकीदार बताकर निम्र वर्ग के कामगारों,सुरक्षा कर्मियों,रक्षकों तथा वास्तविक चौकीदारों से स्वयं को जोडऩे की राजनैतिक चाल चल रहे हों तो गत् पांच वर्षोंं में इस कथित चौकीदार के शासनकाल में देश को हुए नफे-नुकसान का जि़ मेदार भी निश्चित रूप से इसी चौकीदार को ही माना जाएगा।

यह सवाल ज़रूर पूछा जाएगा कि यदि आप प्रधानमंत्री नहीं बल्कि देश के चौकीदार थे तो देश को विभिन्न मोर्चों पर नुकसान क्योंकर उठाना पड़ा? प्रधानमंत्री ने अपने 2014 के भाषण में यह वादा किया था कि देश की राजनीति को अपराध मुक्त कर देंगे। आज पांच वर्षों बाद क्या इस चौकीदार को यह जवाब नहीं देना चाहिए कि आखिर आपने राजनीति को अपराध मुक्त क्यों नहीं किया और इसी के साथ दूसरा सवाल मतदाताओं को यह भी पूछना चाहिए कि गत् पांच वर्षों में धर्म-जाति व राजनीति के नाम पर हिंसा के वातावरण में पहले से अधिक बढ़ोतरी क्योंकर हुई?


प्रधानमंत्री यदि स्वयं को चौकीदार बताते हैं तो क्या उनसे यह सवाल पूछना गैर वाजिब है कि आपने देश में नोटबंदी किस मकसद को लेकर लागू की थी? आपके द्वारा नोटबंदी के बताए जाने वाले कारण आए दिन क्यों बदलते रहते थे और देश को आखिर नोटबंदी से हासिल क्या हुआ?

क्या नोटबंदी के दौरान लाईनों में खड़े होकर मरने वाले लगभग 120 लोगों के प्रभावित परिवार आपकी कथित चौकीदारी पर सवाल नहीं खड़ा कर सकते या एक अयोग्य चौकीदारी नहीं कह सकते? प्रधानमंत्री ने नोटबंदी के समय कैशलेस व्यवस्था तो कभी लेसकैश व्यवस्था की बात की थी। काला धन समाप्त करने की बात कही गई थी आतंकवाद की कमर तोडऩे के लिए नोटबंदी को ज़रूरी बताया गया था।

परंतु उपरोक्त कोई भी लक्ष्य हासिल नहीं हो सका। बजाए इसके देश की आर्थिक विकास की दर जो 2015-16 के दौरान 8.1 प्रतिशत के करीब थी वह 2016-17 के दौरान 7.1 प्रतिशत रह गई। और उसके बाद जीडीपी की विकास दर 6.1 प्रतिशत पर आ गई। गोया भारतीय अर्थव्यवस्था को आर्थिक विकास दर के लिहाज़ से 1. 5 प्रतिशत का नुकसान हुआ।

मोटे तौर पर नोटबंदी के एक वर्ष में 2. 5 लाख करोड़ का नुकसान हुआ। सौ से अधिक लोगों की जानें गईं,देश के वास्तविक चौकीदारों सहित लगभग पंद्रह करोड़ दिहाड़ी मज़दूरों के काम-धंधे बंद हुए। लाखों लोगों की नौकरियां गईं व हज़ारों छोटे व मंझौले उद्योग बंद हो गए। क्या इन सब बातों के बावजूद हमें चौकीदार की कथित चौकीदारी पर उंगली उठाने या उनसे इन बातों का जवाब मांगने का कोई अधिकार नहीं है?


पिछले दिनों भारतीय रिज़र्व बैंक ने एक आरटीआई के जवाब में यह बताया कि उसने नोटबंदी किए जाने की मंज़ूरी नहीं दी थी। इसके बावजूद प्रधानमंत्री ने अकेले ही इतना बड़ा फैसला ले डाला। देश के अनेक बड़े आर्थिक विशेषज्ञ नोटबंदी की कवायद को देश के लिए तथा देश की अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदेह बता चुके हैं। परंतु प्रधानमंत्री को न जाने कैसे व किस प्रकार की शिक्षा-दीक्षा के आधार पर इस बात का ज्ञान हुआ कि वे देश की ठीक-ठाक चल रही अर्थव्यवस्था पर नोटबंदी जैसी गैरज़रूरी सर्जिकल स्ट्राईक करने के बावजूद देश का सफल चौकीदार जताने की कोशिश करें ?

पिछले दिनों एक समाचार यह भी आया कि कुछ राजनैतिक दल अपने 2019 के चुनाव घोषणा पत्र में नोटबंदी के दौरान मारे गए लोगों को मुआवज़ा देने का वादा कर रहे हें तथा नोटबंदी को इस चुनाव में भी आज़ाद भारत का सबसे बड़ा घोटाला बताकर भाजपा के विरुद्ध इसे मु य प्रचार मुद्दे के रूप में इस्तेमाल करने जा रहे हैं। यह बातें प्रधानमंत्री की कथित चौकीदार पर प्रश्रचिन्ह लगाती हैं अथवा नहीं?

हालांकि ‘चौकीदार चोर है’ जैसे असंसदीय व बदनुमा शब्दों का प्रयोग राफेल सौदे में हुए कथित घोटाले से संबंधित है। परंतु ‘मैं भी चौकीदार’ की मुहिम सुरक्षा कर्मियों व रक्षकों को स्वयं से जोडऩे के उद्देश्य से की गई है। अब यदि इन्हीं सुरक्षा कर्मियों व रक्षकों तथा चौकीदारों के ही अधिकारों की बात की जाए तो गत् पांच वर्षों में अनेक बार इन्हीं सुरक्षा कर्मियों की ओर से कभी वन रैेंक वन पेंशन के मामले को लेकर कितने बड़ आंदोलन किए गए,हमारे सुरक्षा कर्मियों को आतंकवादियों से निपटने में तकनीकी दृष्टिकोण से कितनी असुविधाओं का सामना करना पड़ता है,उनके हथियार,ड्यूटी पर उनकी तनावपूर्ण स्थिति,उनकी सीमित आय तथा परिवार के अधिक खर्च हमारे सुरक्षा कर्मियों को तनावपूर्ण स्थिति में रखते हैं। कई बार अर्धसैनिक बलों के कई सुरक्षा कर्मियों द्वारा उनके खाने-पीने की दैनिक दयनीय स्थिति की चर्चा सामने आई।

क्या सरकार ने वर्तमान कथित ‘चौकीदार’ के निर्देश पर उनके खान-पान व उनके रहन-सहन व सुविधा के स्तर में इज़ाफा किए जाने का निर्देश दिया है? हां प्रधानमंत्री द्वारा उनके एक ‘प्रवचन’ में देशवासियों को यह पाठ पढ़ाते ज़रूर सुना गया कि जब कभी सेना के जवान जनता के सामने से गुज़रें तो जनता को उनके स मान में खड़े होकर तालियां बजाकर उनका स्वागत करना चाहिए।

देश के लोगों को इस प्रकार के प्रवचन देने वाले किसी संत ,मार्गदर्शक अथवा अयोग्य चौकीदार की नहीं बल्कि एक सशक्त,सबल,कुशल तथा देश को एक साथ जोडऩे व साथ लेकर चलने वाले प्रधानमंत्री की ज़रूरत है।

:-निर्मल रानी

Related Articles

इंदौर में बसों हुई हाईजैक, हथियारबंद बदमाश शहर में घुमाते रहे बस, जानिए पूरा मामला

इंदौर: मध्यप्रदेश के सबसे साफ शहर इंदौर में बसों को हाईजैक करने का मामला सामने आया है। बदमाशों के पास हथियार भी थे जिनके...

पूर्व MLA के बेटे भाजपा नेता ने ज्वाइन की कांग्रेस, BJP पर लगाया यह आरोप

भोपाल : मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले ग्वालियर में भाजपा को झटका लगा है। अशोकनगर जिले के मुंगावली के भाजपा नेता यादवेंद्र यादव...

वीडियो: गुजरात की तबलीगी जमात के चार लोगों की नर्मदा में डूबने से मौत, 3 के शव बरामद, रेस्क्यू जारी

जानकारी के अनुसार गुजरात के पालनपुर से आए तबलीगी जमात के 11 लोगों में से 4 लोगों की डूबने से मौत हुई है।...

अदाणी मामले पर प्रदर्शन कर रहा विपक्ष,संसद परिसर में धरने पर बैठे राहुल-सोनिया

नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण भी पहले की तरह धुलने की कगार पर है। एक तरफ सत्ता पक्ष राहुल गांधी...

शिंदे सरकार को झटका: बॉम्बे हाईकोर्ट ने ‘दखलअंदाजी’ बताकर खारिज किया फैसला

मुंबई :सहकारी बैंक में भर्ती पर शिंदे सरकार को कड़ी फटकार लगी है। बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे...

सीएम शिंदे को लिखा पत्र, धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को लेकर कहा – अंधविश्वास फैलाने वाले व्यक्ति का राज्य में कोई स्थान नहीं

बागेश्वर धाम के कथावाचक पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का महाराष्ट्र में दो दिवसीय कथा वाचन कार्यक्रम आयोजित होना है, लेकिन इसके पहले ही उनके...

IND vs SL Live Streaming: भारत-श्रीलंका के बीच तीसरा टी20 आज

IND vs SL Live Streaming भारत और श्रीलंका के बीच आज तीन टी20 इंटरनेशनल मैचों की सीरीज का तीसरा व अंतिम मुकाबला खेला जाएगा।...

पिनाराई विजयन सरकार पर फूटा त्रिशूर कैथोलिक चर्च का गुस्सा, कहा- “नए केरल का सपना सिर्फ सपना रह जाएगा”

केरल के कैथोलिक चर्च त्रिशूर सूबा ने केरल सरकार को फटकार लगाते हुए कहा है कि उनके फैसले जनता के लिए सिर्फ मुश्कीलें खड़ी...

अभद्र टिप्पणी पर सिद्धारमैया की सफाई, कहा- ‘मेरा इरादा CM बोम्मई का अपमान करना नहीं था’

Karnataka News कर्नाटक में नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि सीएम मुझे तगारू (भेड़) और हुली (बाघ की तरह) कहते हैं...

Stay Connected

5,577FansLike
13,774,980FollowersFollow
135,000SubscribersSubscribe
- Advertisement -

Latest Articles

इंदौर में बसों हुई हाईजैक, हथियारबंद बदमाश शहर में घुमाते रहे बस, जानिए पूरा मामला

इंदौर: मध्यप्रदेश के सबसे साफ शहर इंदौर में बसों को हाईजैक करने का मामला सामने आया है। बदमाशों के पास हथियार भी थे जिनके...

पूर्व MLA के बेटे भाजपा नेता ने ज्वाइन की कांग्रेस, BJP पर लगाया यह आरोप

भोपाल : मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले ग्वालियर में भाजपा को झटका लगा है। अशोकनगर जिले के मुंगावली के भाजपा नेता यादवेंद्र यादव...

वीडियो: गुजरात की तबलीगी जमात के चार लोगों की नर्मदा में डूबने से मौत, 3 के शव बरामद, रेस्क्यू जारी

जानकारी के अनुसार गुजरात के पालनपुर से आए तबलीगी जमात के 11 लोगों में से 4 लोगों की डूबने से मौत हुई है।...

अदाणी मामले पर प्रदर्शन कर रहा विपक्ष,संसद परिसर में धरने पर बैठे राहुल-सोनिया

नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण भी पहले की तरह धुलने की कगार पर है। एक तरफ सत्ता पक्ष राहुल गांधी...

शिंदे सरकार को झटका: बॉम्बे हाईकोर्ट ने ‘दखलअंदाजी’ बताकर खारिज किया फैसला

मुंबई :सहकारी बैंक में भर्ती पर शिंदे सरकार को कड़ी फटकार लगी है। बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे...