शाहीन बाग में धरना हक मांगने कि लड़ाई नहीं, बल्कि हिंदुओं का हक छीनने की जिद – रिजवी

शिया सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के खिलाफ दिल्ली के शाहीन बाग में जारी धरने पर तंज कसा है।

उन्होंने कहा कि शाहीन बाग का धरना हक मांगने कि लड़ाई नहीं है बल्कि हिंदुओं का हक छीनने की जिद है।

वसीम रिजवी ने कहा कि पाकिस्तान पहले कसाब (अजमल आमिर कसाब) भेजता था, लेकिन अब ‘ओवैसी वायरस’ से हिंदुस्तान में कसाब तैयार किये जा रहे हैं।

वसीम रिजवी ने गुरुवार को मीडिया में बयान देकर कहा कि अगर ऐसे ही हालात रहे तो इस्लामिक दाढ़ी और बगैर मूंछ के डरावने चेहरे हिंदुस्तान की गंगा-जमुनी तहजीब को तार-तार कर देंगे।

उन्होंने कहा कि शाहीन बाग जैसे हजारों धरने हो जाएं लेकिन सीएए (CAA) पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

बता दें कि वसीम रिजवी लगातार अपने बयानों को लेकर चर्चाओं में बने रहते हैं। इससे पहले उन्होंने बरेली में तौकीर रजा के बयान पर उन्हे नामर्द कहा था, जो बेहद विवावित रहा था। सीएए के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों पर लगातार वसीम रिजवी सख्त बयानबाजी करते रहे हैं।

बता दें कि दिल्ली के शाहीन बाग इलाके में महिलाएं और अन्य 15 दिसंबर, 2019 से धरने पर बैठे हुए हैं। उनकी मांग है कि सरकार CAA कानून को तत्काल वापस ले।

दो महीने से ज्याादा समय से जारी धरना की वजह से लोगों को आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मसले का हल निकालने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा पिछले दिनों प्रदर्शनकारियों से बातचीत के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए थे।

इसके तहत बुधवार को दोनों पर्यवेक्षकों साधना रामचंद्रन, संजय हेगड़े ने यहां पहुंचकर प्रदर्शन कर रहे लोगों की बात सुनी थी।