World Humanitarian Day पर ममता बनर्जी ने किया Tweet कश्मीर में मानव अधिकारों का जबरदस्त उल्लंघन हुआ

नई दिल्ली : जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के बाद घाटी में हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। कई इलाकों में लगी पाबंदियों में धीरे-धीरे ढील दी जा रही है और साथ ही स्कूल व बाजार भी खोले जा रहे हैं। सेना ने लोगों से अपील की है कि वो अफवाहों पर ध्यान ना दें, घाटी में हालात पूरी तरह सामान्य हैं। वहीं, जम्मू कश्मीर को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मोदी सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है। ममता बनर्जी ने विश्व मानवतावादी दिवस पर ट्वीट कर कहा है कि जम्मू कश्मीर में मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है।

पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के मुद्दे पर ट्वीट करते हुए कहा, ‘आज विश्व मानवतावादी दिवस है। कश्मीर में मानवाधिकारों का पूरी तरह से उल्लंघन हुआ है। आइए हम कश्मीर में मानव अधिकारों और शांति के लिए प्रार्थना करें। मानवाधिकार एक ऐसा विषय है जो मेरे दिल के बेहद करीब है। साल 1995 में लॉक-अप में हुई मौतों के खिलाफ मानवाधिकारों का उल्लंघन होने से बचाने के लिए मैं 21 दिनों तक सड़कों पर रही थी।’

आपको बता दें कि ममता बनर्जी ने इससे पहले भी जम्मू कश्मीर को लेकर उठाए कदम पर मोदी सरकार की आलोचना की थी। ममता बनर्जी ने कहा था कि जम्मू कश्मीर से संविधान की धारा 370 को खत्म करने की प्रक्रिया गलत है। इस बीच, जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने धीरे-धीरे राज्य में लगे प्रतिबंधों में ढील देना शुरू कर दिया है। जम्मू कश्मीर से धारा 370 को हटाए जाने के बाद सुरक्षा कारणों के मद्देनर बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है। जम्मू कश्मीर को लेकर लिए गए फैसले के बाद राज्य में मोबाइल और इंटरनेट सेवा भी बंद कर दी गई थी।

गौरतलब है कि बीते 5 अगस्त को गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने का प्रस्ताव पेश किया था। राज्यसभा और लोकसभा में यह बिल पास होने के बाद राष्ट्रपति ने भी इस बिल को मंजूरी दे दी, जिसके बाद जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटा दी गई। इस बिल के पास होने के बाद अमित शाह ने ट्वीट करते हुए कहा था, ‘आज, मोदी सरकार ने लंबे समय से अपेक्षित एक ऐतिहासिक गलती को ठीक कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को हमारी मातृभूमि की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने के लिए उनकी अटूट प्रतिबद्धता पर बधाई। यह ऐतिहासिक निर्णय जम्मू कश्मीर और लद्दाख क्षेत्र में शांति और विकास की एक नई सुबह की शुरूआत करेगा। कश्मीर हमेशा से भारत का अभिन्न अंग रहा है, लेकिन यह निर्णय यह सुनिश्चित करेगा कि अब जम्मू-कश्मीर में दो निशान, दो संविधान नहीं रहेंगे। यह निर्णय उन सभी देशभक्तों के लिए एक श्रद्धांजलि है, जिन्होंने एक अखंड भारत के लिए अपना सर्वस्व बलिदान किया।’