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प्राकृतिक रंगीन कपास से होगा पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान – डॉ मंडलोई

vidyakunj international school khandwaखंडवा : ग्लोबल वार्मिंग के विश्वव्यापी संकट से निपटने की दिशा में प्राकृतिक रंगीन कपास का व्यावसायिक उत्पादन कर कई तरह की पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। वस्त्र उद्योग में सर्वाधिक प्रदुषण वस्त्रों की रंगाई के कारण होता है जिससे बड़ी तादाद में जल स्त्रोत प्रदूषित होते है। वस्त्रों की रंगाई को केमिकल प्रोसेस से बचाकर लोगो को एलर्जी का शिकार होने से भी बचाया जा सकता है।

प्राकृतिक रंगीन कपास को पहली बार प्रयोगशाला से बाहर लाकर किसानो के खेतों तक पहुँचाने वाले देश के ख्यात कृषि वैज्ञानिक डॉ के सी मंडलोई ने विद्याकुंज इन्टरनेशनल स्कूल के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए यह बात कही। मूलतः खण्डवा में रहकर अनेक कृषि अनुसन्धान करने वाले डॉ मंडलोई सेवानिवृति के बाद मुंबई में निवासरत है , वे लगभग एक दशक बाद अपनी कर्मभूमि खण्डवा आये। यहाँ उन्होंने काफी वक्त विद्याकुंज के विद्यार्थियों के साथ बिताया और उन्हें ना केवल प्राकृतिक रंगीन कपास के अनुसन्धान की पूरी कहानी बताई बल्कि इसकी मौजूदा वक्त में प्रासंगिकता भी रेखांकित की।

डॉ मंडलोई ने बताया कि सामान्यतः लोग कपास को सिर्फ सफ़ेद रंग का ही मानते है जबकि प्रकृति के खजाने में इसके अनेक रंग मौजूद है। गुलाबी ,हरा,पीला,भूरा, और कई रंगों का कपास कपास के जेनेटिक बैंक में संरक्षित है. चूँकि सफ़ेद कपास का व्यावसायिक उत्पादन ही ज्यादा होता है इसके लिए कृषि वैज्ञानिको ने भी अनुसन्धान इसी की गुणवत्ता विकसित करने पर दिया। जब दुनिया में लोगो को त्वचा की एलर्जी के चलते कॉटन के वस्त्रों की मांग बढ़ी तब कुछ शिकायते लोगों को कॉटन वस्त्र के केमिकल युक्त रंग के कारण भी आई। ऐसे में यह विचार आया कि क्यों ना खेतो से ही रंगीन कपास का उत्पादन हो जिसे रंगने की जरूरत ही ना पड़े और उसके सीधे वस्त्र बन सके।

इसी चुनौती को उन्होंने स्वीकारा और वस्त्र बनाने के लिए उपयुक्त प्राकृतिक रंगीन कपास का अनेक रंगों और शेड्स में उन्होंने उत्पादन किया। प्रयोग के बतौर निमाड़ के विभिन्न हिस्सों में किसानो को भी इसके बीज उपलब्ध कराये गए। किसानो में भी इसके उत्पादन को लेकर खासा उत्साह रहा लेकिन व्यावसायिक रूप से यह कार्य आगे नहीं बढ़ पाया। इसका उत्पादन यदि जारी रहता तो तो किसानो को इससे खासा लाभ मिलता ,चूँकि सफ़ेद कपास की तुलना में वैश्विक बाज़ार में इसकी कीमत करीब तिगुनी-चौगुनी है।

डॉ मंडलोई सपत्निक स्कूल के कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने विद्याकुंज स्कूल की अत्याधुनिक शिक्षण पद्धति ,स्मार्ट क्लास के साथ ही समस्त सुविधाओं को देखा और इसकी मुक्तकंठ सराहना भी की। उन्हने कहा कि खण्डवा जैसे छोटे शहरों में महानगरो जैसी शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध होना काफी महत्वपूर्ण है।

उन्होंने बच्चो को भी प्रेरित करते हुए कहा कि वे पूरी मेहनत और लगन से किसी भी लक्ष्य को हासिल कर सकते है। डॉ मंडलोई ने बच्चों के सवालों के बड़े ही सरल तरीके से जवाब भी दिए। कार्यक्रम के आरम्भ में विद्याकुंज के डायरेक्टर जय नागड़ा ने स्वागत उदबोधन में डॉ मंडलोई की महत्वपूर्ण उपलब्धियों से विद्यार्थियों को परिचित कराया।

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