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Friday, April 4, 2025

चिट फंड घोटालों की धोखा धड़ी पर बेबस सरकार

cheat fund scam rajesh mauryaनई दिल्ली- उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में ऐरायां ब्लॉक के अंतर्गत खजरियापुर गाँव में नवम्बर 2015 से हमारा मिशन नाम की चिट फंड ने लोगों का अरबों रुपया लेकर फरार हो गयी है, वैसे भी चिट फंड कंपनियों का ये कोई पहला घोटाला नहीं है इससे पहले भी देश में कई चिट फंड कंपनियों द्वारा घोटाला किया गया है जिनमें से कुछ के मामले अभी भी जाँच के अंतर्गत विचाराधीन हैं ! हाल ही में पूरे देश में शारदा चिट फंड घोटाला खूब चर्चित रहा है जिसको लेकर पश्चिम बंगाल में सरकार और विपक्ष (माकपा) के बीच खूब बयानबाजियां और पोस्टर बाजियां भी होती रहीं हैं ।
एक का दो और दो का चार बनाने का दावा करने वाली चिट फंड कंपनियां कुछ ही समय में लोगों को लखपती बनाने का दावा करती हैं, इसी लालच में अच्छे अच्छे लोग ऐसी कंपनियों के झाँसे में आ जाते हैं जिसमें भोले -भोले सामान्य व्यक्तियों के अलावा कई बुद्धजीवी वर्ग भी फंस जाते हैं, ऐसी चिट फंड कंपनियों का जाल पूरे देश में फैला है ।
यूँ शुरू हुआ हमारा मिशन
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के खजरियापुर गाँव निवासी राजेश मौर्या ने प्रेमनगर कस्बे की खस्ताहाल सड़क को अपने निजी पैसों से सुधार कराकर अपना विश्वास लोगों में जमाने लगा पहले तो लोग ये समझने लगे की शायद आगामी होने वाले 2017 के विधान सभा की तैयारी के चलते ये सब हो रहा है पर सच तो कुछ और ही था, इसी के चलते क्षेत्रीय लोगो का विश्वास और साथ भी राजेश मौर्या को मिलने लगा और लोगों ने राजेश को समाजसेवी मानते हुए “सर” की उपाधि तक दे दिया !

क्षेत्र में लोग उन्हें सर के नाम से पुकारने लगे इतना ही नहीं इसके बाद राजेश ने अपनी शादी की और बारात कानपुर शहर ले गया जहाँ उसने इंजीनियर पूजा से शादी की, लोगों में और विश्वास जमाने के लिए राजेश ने शादी में दिखावा करते हुए पूरे इलाके के लोगों को आम तौर से निमंत्रण दिया, बारात में 700 लक्जरी चार पहिया वाहन और कई लक्ज़री बसों का भी इंतेजाम किया और एक शानदार भोज भी लोगों को दिया औरउसके बाद काम शुरू किया चिट फंड का और लोगों को लालच देकर निवेश कराना शुरू किया, उसने मिशन ग्रुप्स ऑफ़ कम्पनीज़ के बैनर तले आयुर्वेदिक दवा बनाने के नाम पर पैसा लेना शुरू कर दिया|

हमारा मिशन कैसे करती थी काम
लोगों से एकमुश्त रूपए 30 हजार लिए जाते थें और उन्हें अगले माह की जमा तारिख से रूपए 10 हजार लगातार 11 महीनों तक दिए जाने का कंपनी ने वादा किया था, (यानि रूपए 30 हजार एकमुश्त देकर प्रत्येक 11 महीने तक रूपए 10 हजार यानि रूपए 1 लाख 10 हजार दिए जाने का वादा था) इसी प्रकार से लोगों का लालच बढ़ता गया और निवेशकों की संख्या दिन क दिन बढ़ती गयी !

मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर हमारा मिशन की कमाई 90 करोड़ रूपए से ज्यादा ही हुयी है और ये कंपनी के संचालक राजेश मौर्या, उनके भाई ब्रजेश मौर्या और उनकी पत्नी पूजा मौर्या तथा खजरियपुर गाँव के कुछ अन्य जो राजेश के सहयोगी और पारिवारिक थें तथा मिशन कार्यालय के सक्षम कर्मचारी दिनांक 18 मार्च को लोगों का पैसा लेकर फरार हो गए हैं |

कैसे बनाए जाते थें एजेंट्स
सबसे पहले राजेश मौर्या ने अपनी बिरादरी यानि मौर्या बिरादरी के लोगों को एजेंट्स बनाया और लोगों का निवेश कराना शुरू कर दिया था धीरे – धीरे इन्हीं एजेंटों के माध्यम से अन्य लोगों को भी एजेंट बनाना शुरू किया गया, कंपनी द्वारा जमा की कोई रशीद या कागज़ नहीं दिया गया सिर्फ एक डायरी बनायीं जाती थी जिसमें हर एजेंट्स अपने क्लाइंट का डिटेल रखता था धीरे – धीरे आगे चलकर कंपनी द्वारा एक शपथ – पत्र भी निवेशकों द्वारा भरवाया जाने लगा जिसमें लिखा गया की हम कंपनी को दान स्वरुप रूपए 30 हजार दे रहे हैं |

एजेंटों का लालच / कमीशन
प्रत्येक एजेंट को कंपनी की तरफ से 10 क्लाइंट देने पर दुपहिया वाहन लेने के लिए रूपए 25 हजार नगद व रूपए 2000 रूपए किश्त लगातार 17 महीने तक दिए जाने को कहा गया था और इतना ही नहीं 30 क्लाइंट्स देने पर चार पहिया वाहन लेने के लिए रूपए 1 लाख नगद व 40 महीनों तक रूपए 5 हजार की किश्त दिए जाने को कहा गया था इतना ही नहीं प्रत्येक एजेंट को उनके क्लाइंटों की प्रत्येक वापसी पर रूपए 1500 भी दिए जानेका वादा किया गया था (यानि एक क्लाइंट को 11 माह तक रूपए 10 हजार वापसी की जाती थी तो उनके वापसी के साथ ही एजेंट को भी 11 महीने तक रूपए 1500 दिया जाना था यानि की एक क्लाइंट पर रूपए 16 हजार 500 दिए जाने का वादा था) |

कौन है राजेश मौर्या
फतेहपुर जिले के तहसील – खागा के अंतर्गत ऐरायां ब्लॉक की ग्राम सभा – ऐरायां सादात के गाँव – खजरियापुर के रहने वाले मंगल प्रसाद मौर्या के बड़े बेटे हैं राजेश मौर्या |

कहाँ – कहाँ फैला है हमारा मिशन
कंपनी के फरार होने केबाद निवेशकों का हुजूम सामने आया है पहले तो लोगों को सिर्फ इतना ही पता था की ये खेल सिर्फ यहीं चल रहा है पर ऐसा नहीं था कंपनी के एजेंट्स फतेहपुर जिले में ही नहीं कौशाम्बी, प्रतापगढ़, बांदा, चित्रकूट, रायबरेली, उन्नाव तथा अन्य कई जिलों में भी फैले थें और लोगों का निवेश कराये हुए थें |

हमारा मिशन के संचालकों के फरार होने के बाद एजेंटों की प्रतिक्रिया
अशोक तिवारी इलाके के बड़े व्यापारी हैं उनकी मानें तो हमारा मिशन कंपनी ने लोगों को साग सब्ज दिखाकर लोगों को ठग कर भाग गयी है, उनके द्वारा घर, परिवार और मित्रों का तकरीबन रूपए 15 लाख निवेश किया गया है, वहीँ ऐरायां सादात के प्रधान पति शमशाद कुरैशी, जोकि राजेश मौर्या के बहुत ही नजदीकी माने जाते थें का भी उनके परिवार और अन्य लोगों का तकरीबन रूपए 20 लाख का निवेश कराया गया है इसी प्रकार से सैकड़ों एजेंट्स और भी हैं जिनके माध्यम से लाखों रूपए कंपनी में जमा कराया गया है !

इन सभी लोगों द्वारा संबंधित थाना – सुल्तानपुर घोष में राजेश मौर्या, ब्रजेश मौर्या, पूजा मौर्या के साथ ही उसी गाँव के अन्य लोगों पर मामला भी दर्ज कराया गया है पर सभी लोग फरार हैं | लोगों का आरोप है कि जिला प्रशासन और पुलिस कार्यवाही नहीं कर रही है, मामले को ठन्डे बस्ते में डाले हुए है इतना ही नहीं कुछ तो ये भी चर्चा कर रहे है कि उत्तर प्रदेश शासन के कुछ मंत्री व नेतागण भी मिले हुए हैं या कुछ रिश्वत लिए हुए हैं जो कार्यवाही नहीं होने दी जा रही है |

कंपनी बंद होने से हुई मौत
सुल्तानपुर घोष गाँव के निवासी राकेश यादव का बेटा दिनेश यादव मिशन में बतौर एजेंट्स काम कर रहा था जब पैसों की वापसी न हुई तो निवेशक एजेंट्स के रोज घर के चक्कर काटने लगे और सरे आम एजेंट्स को बेइज्जत करने लगें, बताया गया है की दिनेश यादव द्वारा लगभग रूपए 10 लाख का निवेश कराया गया था एजेंट्स की और पारिवारिक स्थिति इतनी अच्छी भी नहीं थी की लोगों का पैसा वापस कर सके इसी सदमे के चलते एजेंट्स के पिता की मौत हो गयी !

इसके अलावा और भी कई एजेंटों के पागल स होने व बीमार होने पे कंपनी संचालक ने रातों – रात इलाके में होर्डिंग लगवा दी की आप सभी के पैसों से मैंने जमीन खरीद ली है जब जमीन बिक जाएगी तो 6 महीने तक आप सबका पैसा वापस कर दिया जाएगा, साथ ही इस कंपनी में लालच के चलते डोली का पुरवा निवासी झूरी भैंस बेचकर, प्रेमनगर के कपडा व्यवसायी सय्यद इस्तेयाक ने अपनी दूकान बेचकर, प्रेमनगर की मीरा बैंक से लोन लेकर, कसेरुआ की बिटान देवी और पोखरी के कल्लू और बुद्धिलाल ने साहकारके कर्ज लेकर, बेहटापर के कल्लू व मनोज ने के.सी.सी. से कर्ज लेकर पैसे जमा किये हैं अब इन लोगों को कोई सहारा नहीं दिखाई देता है ये सभी भी इस वक़्त सदमे में हैं |
पहले भी फ्रॉड कर चुके हैं राजेश मौर्या
फतेहपुर जिले में कंपनी स्थापित करने से पहले इलाहाबाद में राजेश मौर्या और उसकी कंपनी राज्य कल्याण मिशन (RKM) पर इलाहाबाद पुलिस ने छपा मारकर लाखो रूपए बरामद किये थें, इलाहाबाद कोतवाली थाने में शिकायत मिली थी कि RKM बतौर चिट फंड कंपनी के रूप में कार्य करते हुए लोगों से रूपए 3 हजार एकमुश्त लेकर लोगों को 11 माह तक रूपए 1000 देने का दावा कर रही है साथ ही एजेंट्स को 5 % कमीशन देने का लालच दे रही है, कंपनी ने छाप मारकर कंपनी को सील कर दिया था |

इसके अलावा भी कंपनी पर पहले कई बार छापे पड़ चुके थें इस पर तो इनकम टैक्स का भी छापा पड़ चुका है, इनकम टैक्स ने लाखों रूपए जब्त करके ट्रेजरी में जमा करा दिया था साथ ही इलाहबाद में मानसरोवर सिनेमा हाल के पीछे कार्यालय पर पुलिस ने छापा मारकर लगभग रूपए 70 लाख बरामद किये थें |

क्या है चिट फंड
घरेलु स्तर का निवेश संघ जिनके माध्यम से आम तथा छोटे – छोटे निवेशक एक समूह बनाकर निवेश करते हैं जिनमें से तो कई के बैंक खाते तक नहीं होते, हमारे देश में अभी तक इस तरह की स्कीमों के लिए चिट फंड अधिनियम 1982 रहा है | चिट फंड योजनाओं का व्यवस्थापन संगठित वित्तीय संस्थाओं या असंगठित समूहों या किसी व्यक्ति, मित्र आदि द्वारा चलाया जा सकता है |

निगरानी
देश भर में व्यक्तिगत स्तर पर चल रहीं विभिन्न प्रकार की अनाधिकृत समूह निवेश योजनाओं को बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (सेबी (SEBI – Securities and Exchange Board of इंडिया)) निगरानी करती है, और सेबी ने फर्जीवाड़ा व अनुचित व्यापारिक चलन घोषित करने का फैसला किया है इस संबंध में सेबी ने 12 अगस्त, 2013 को निर्देश जारी किया है, निर्देश में कहा गया है कि नियामक से आवश्यक प्रमाण पत्र प्राप्त किये बिना सामूहिक निवेश कि किसी भी योजना को क्रियान्वित व संचालित नहीं किया जा सकता है !

हाल ही में सेबी को यह अधिकार भी दिया गया है कि गैर सूचीबद्ध कंपनियों द्वारा पूँजी जुटाने की उन योजनाओं (पोंजी योजनाओं या चिट फंड) को नियमित कर सकती है जिनमें 100 करोड़ या अधिक राशि का निवेश हो रहा है, सेबी द्वारा अनाधिकृत निवेश योजनाओं के संचालन पर कडा दण्ड लगाया जा सकता है |

चिट फंड के मामले
कुछ दिनों पहले सरकार ने 57 चिट फंड कंपनियों की जांच धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) से कराया था इसके अलावा कई बड़ी कंपनियों की जांच खुद सेबी कर रहा है |
पिछले दो सालों में SFIO (Serious Fraud Investigation Office) में 107 कंपनियों पर मामला दर्ज किया गया है , साथ ही ED (Directorate of Enforcement) ने 19 केस दर्ज किये हैं, इन 117 में से 96 कंपनियां सिर्फ पश्चिम बंगाल की हैं ( ये जानकारी राज्य सभा में वित्त राज्य मंत्री श्री जयंत सिन्हा ने एक सवाल के जवाब में लिखित में दिया था) |

चिट फंड के कुछ मामले
ओडिशा में ओडिशा पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने शारदा समूह के कई दफ्तरों को बंद कर दिया जबकि वहीँ केंद्रपाड़ा जिला प्रशासन ने चिट फंड कंपनियों में निवेश के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए पंचायती राज संस्थाओं को शामिल करके अभियान चलाया |

पटना पुलिस ने 14 चिट फंड कंपनियों के कार्यालयों में छापा मारकर लाखों रूपए जब्त किये व 11 लोगों को गिरफ्तार भी किया

छत्तीसगढ़ में सैकड़ों चिट फंड कम्पनियाँ फर्जी ढंग से चल रही थीं इन कंपनियों के पास 500 – 700 करोड़ रूपए की धोखा धड़ी का आरोप है, ये कम्पनियाँ न तो सेबी से और ना ही भारतीय रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया से रजिस्टर्ड हैं |

चिट फंड की बदनाम कंपनियां
शारदा, अमेजान, सुराह माइक्रो फाइनेंस, सन्मार्ग, आई कोर, रोज वैली, अलकेमिस्ट जैसी कई नामी कंपनियों के अलावा हजारों अन्य कंपनियां भी शामिल हैं | अब तक 17,31,065 मुआवजे के लिए आवेदन पत्र प्राप्त हो चुके हैं |

रिपोर्ट @शीबू खान

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