बड़वाह : नर्मदा नदी में नाव डूबी 9 लोगों को रेस्क्यू कर निकाला दो लापता

ओंकारेश्वर : मोरटक्का में नर्मदा नदी पर बने पुल के निचे शुक्रवार दोपहर 2:00 बजे के करीब नर्मदा नदी में नाव के पलटने से कई लोग नर्मदा नदी में डूबने लगे। घटना की जानकारी मिलते ही मोरटक्का पुलिस एवं बड़वाह पुलिस गोताखोरों को लेकर मौके पर पहुंच गई और रेस्क्यू शुरू हुआ नाव पलटने से नदी में डूबे 9 लोगों को रेस्क्यू कर शाम तक सुरक्षित निकालकर अस्पताल भिजवाया गया है।

सैफाली पिता राजकुमार वर्मा निवासी सनावद 25 वर्ष, पूजा कमलेश वर्मा इंदौर, नेहा पति नितिन वर्मा निवासी महू, रश्मि पति आनंद वर्मा निवासी महु, नेहा पति विजय वर्मा निवासी सनावद, राजकुमार पिता राम प्रसाद निवासी सनावद, लक्ष्मीबाई उर्फ चंदा पति रंगीलाल निवासी इंदौर, जितेश पिता गोविंद, नमिता पति जितेंद्र वर्मा निवासी सरलाय (बडवाह) यह लोग अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। बाकी हीना पति जितेन्द्र वर्मा निवासी सनावद एवं जितेन्द्र पिता किशोरीलाल वर्मा निवासी सनावद इन दोनों की तलाश जारी हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार नर्मदा नदी में चुनरी औढा़ने के लिए सभी श्रद्धालु यहां पहुंचे थे इसी दौरान नर्मदा नदी पर बने पुल के पिलर से नाव के टकरा जाने से नाव पलट गई। पुलिस की मौजूदगी में गोताखोर नदी में लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं एसडीएम सहित पुलिस के आला अधिकारी भी मौके पर मौजूद है गोताखोरों के साथ स्थानीय केवट बंधुओं की भी मदद ली जा रही है स्थानीय गोताखोरों की मदद से इनमें से 9 को सुरक्षित बचा लिया गया है। पानी में डूबे दो लोगों की तलाश अभी जारी है।

शुरुआती जांच से यह प्रतीत होता है कि नाव में उसकी क्षमता से अधिक लोग सवार थे जिस वजह से यह दुर्घटना हुई प्रतिवर्ष नर्मदा नदी में नाव की दुर्घटनाएं आम बात सी हो गई है। लेकिन खंडवा जिला प्रशासन द्वारा कोई सार्थक पहल नहीं की जाती पैसे कमाने के लिए यहां बड़े पैमाने पर नावों को नाबालिक संचालित कर रहे हैं इन नावों का रजिस्ट्रेशन है कि नहीं यह भी जांच का विषय है लेकिन प्रशासन समय रहते इन पर अंकुश लगाता है तो इस प्रकार के हादसे रोके जा सकते थे।

ओंकारेश्वर में कलेक्टर के आदेश को दरकिनार कर नर्मदा नदी में नौका संचालन की सशर्त दी गई अनुमति पर कोई अमल नही ज्योतिर्लिंग नगरी ओंकारेश्वर में अंग्रेजी नव वर्ष को लेकर ओंकारेश्वर पंहुचने वाले श्रद्धालुओं में खासा उत्साह हैं लाखों की संख्या में पर्यटक ओंकारेश्वर पंहुच रहे हैं वहीं किसी प्रकार का सांकेतिक सूचना बोर्ड ना होने से नाविक लोग इसी का फायदा उठा रहे हैं।यहां पर तीर्थयात्रियों को भ्रमित करते हुए नाविकों द्वारा विभिन्न दार्शनिक स्थल हाथ में लिये चित्र पर दिखाकर ठगा जाता हैं।

ओंकार पर्वत परिक्रमा का 11 हजार रुपये तक शुल्क तय कर परिक्रमा कराई जाती हैं।बात यहीं खत्म नही होती ब्रम्हपुरी घाट पर नाव संचालको की दादागिरी इतनी हैं की कोई भी तीर्थयात्री को 15 मिनट नाव में घुमाने के 15 सौ से लगाकर 2 हजार तक की राशी वसुली जा रही हैं।अन्य घाट के नाविक अगर ब्रम्हपुरी घाट पर नाव लेकर कम भाव में तिर्थयात्रियों से बात तय करता है तो उसे ब्रम्हपुरी घाट पर स्थित नावसंचालकों द्वारा डरा धमका कर रवाना कर दिया जाता हैं।इस और स्थानीय प्रशासन जब कार्यवाई की बात करता हैं तो पारिवारिक आर्थिक स्तर का रोना शुरु कर ईमोशन ब्लेकमैलिंग महिलाओं द्वारा की जाती हैं।

ज्ञात रहें ओंकारेश्वर में पाँच माह पुर्व 29 जुलाई को खण्डवा जिला प्रशासन ने नावों के संचालन की अनुमति सशर्त नाविकों को राहत पंहुचाने के उद्देश्य से दी गई थी। जिसमें नावों के संचालन के दौरान दी गई शर्तों का पालन करना होगा। इसका उल्लंघन करने पर नाविकों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया था।
इसके लिए 29 जुलाई बुधवार को एसडीएम ने निर्देश जारी कर दिए थे। ओंकारेश्वर में कोरोना संक्रमण की वजह से प्रशासन ने अप्रेल माह से नौका संचालन पर प्रतिबंध लगा दिया था।

यह है शर्तें…

नावों का संचालन ब्रह्मपुरी घाट, चक्रतीर्थ घाट, गौमुख घाट और नागर घाट से होगा। इन घाटों पर नाविक समिति बनाई जाएगी, वहीं बुकिंग सेंटर बनाकर किराया सूची का बोर्ड लगाया जाएगा। इस पर नाविकों की सूची, मोबाइल नंबर और रजिस्ट्रेशन नंबर अंकित करना अनिवार्य होगा।

प्रतिदिन ब्रह्मपुरी घाट व गौमुख घाट से 10-10 और चक्रतीर्थ घाट व नागर घाट से सात-सात नावों का संचालन किया जाएगा।

यात्रियों को लाइफ जैकेट, सैनिटाइजर और मास्क का उपयोग करना होगा। रजिस्टर्ड नावें ही संचालित होंगी। लोहे की नाव पूर्णत प्रतिबंधित रहेंगी। प्रति नाव में अधिकतम दो सवारी और दो नाविकों को अनुमति रहेगी।

भीड़ को देखते हुए प्रशासन उद्घोषणा कर नावों का संचालन प्रतिबंधित कर सकता है। बांध से अधिक पानी छोड़े जाने पर नाविक संगम घाट की ओर नाव नहीं ले जा सकेंगे।

शाम छह से सुबह छह बजे तक नौका संचालन पर प्रतिबंध रहेगा। कोरोना संक्रमण को देखते हुए यात्री न तो घाट पर स्नान करेंगे और न ही रुकेंगे। इसकी पूर्ण जिम्मेदारी नाविक की रहेगी।

नाविक समिति सदस्यों के नाम और मोबाइल नंबर की सूची पंजीयन सेंटर और नगर परिषद कार्यालय में जमा करना होगा।

नियत क्षमता से अधिक यात्री बैठाने, नशे की स्थिति में नाव संचालन, मास्क व लाइफ जैकेट के बिना सवारी बैठाने पर संबंधित लाइसेंसधारी नाविक और नाव संचालक पर धारा 188 की कार्रवाई की जाएगी।