मंडला – मंडला मे ब्राम्हण समाज द्वारा एक विशाल रैली निकालकर मध्य प्रदेश सरकार को चेताया गया। दरअसल ब्राम्हण समाज सरकार के उस फैसले से आहत है जिसमे सरकार ने दलितों को पुजारी बनाने और सरकारी खर्च पर उन्हें प्रशिक्षण देने की नीति बनाई है। इस रैली के जरिये ब्राम्हण समाज ने सरकार के फैसले के खिलाफ नाराज़गी जताई राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौप कर उनसे मध्य प्रदेश सरकार के इस निर्णय को बदलने हस्तक्षेप करने की मांग की। जब – जब ब्राम्हण बोला है राज सिंहासन डोला है जैसे नारे लगते हुए भारी संख्या में ब्राम्हण महिला – पुरुष, बच्चे – बूढ़े मंडला की सड़कों में प्रदेश की बीजेपी सरकार के खिलाफ हुंकार भरते हुए सड़कों पर उतरे।
मंडला मे ब्राम्हण समाज कि यह विशाल रैली प्रदेश की शिवराज सरकार के खिलाफ खुली वैचारिक जंग का एलान है। पुरतान काल से पुजारी के दायित्वों का निर्वहन कर रहे ब्राम्हण शिवराज सरकार के एक फैसले से काफी आहत है। मध्य प्रदेश सरकार ने हाल ही में दलितों को पुजारी बनाने और सरकारी खर्च पर उन्हें प्रशिक्षण देने की नीति बनाई है। ब्राम्हण समाज ने सरकार से इस निर्णय को तत्काल रद्द करने की मांग की है। ब्राम्हणों का कहना है कि वे सनातन धर्म की व्यवस्था के अनुरूप पीढ़ियों से पुजारी रहे है। पुजारी का दायित्व ब्राम्हण के लिए सम्मान के साथ साथ जीविकोपार्जन का साधन भी है। ब्राम्हण समाज को हेरत इस बात की है कि प्रदेश के मुखिया शिवराज खुद एक ब्राम्हण से दीक्षा लेने के बावजूद ब्राम्हण विरोधी फैसला कैसे ले सकते है।
पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष सुनील दुबे इसे एक विकृत राजनीती का हिस्सा बता रहे है। सरकार गलत तरीके से सामाजिक व्यवस्था से छेड़ छाड कर रही है। उनका कहना है कि गुलामी के दौर में भी कभी किसी ने समाज और धर्म के विरुद्ध कोई फैसला नहीं किया। प्रदेश सरकार ने अपने इस फैसले से दो समाज को बांटने का खतरनाक खेल, खेल रही है। उनका कहना है कि आरक्षण की वजह से ब्राम्हण उपेक्षित है अब उसकी रोजी रोटी में भी हाथ मारा जा रहा है।
ब्राम्हण के लिए मंदिर में पूजा पाठ का काम उसके लिए काफी प्रतिष्ठा का काम है। यह व्यवस्था के साथ आज तक कोई छेड़ छाड नहीं हुई। सरकार इससे खिलवाड़ करने का दुस्साहस न करें। सरकार को चाहिए की वो अपनी सरकार चलाये सामाजिक ताने बाने से खिलवाड़ न करें। ब्राम्हण समाज की इस रैली का माझी समाज व सिंधी समाज सहित अन्य समाजों ने भी समर्थन किया है।
@सैयद जावेद अली















