22.6 C
Indore
Monday, September 20, 2021

यदि यह न्याय है तो क्या है अन्याय की परिभाषा?

गत् 22 मार्च को दिल्ली की एक निचली अदालत द्वारा 28 वर्ष पूर्व अर्थात् 22 मई 1987 को हुए उत्तर प्रदेश के मेरठ जि़ले के चर्चित हाशिमपुरा नरसंहार पर अपना फैसला सुनाया गया। अदालत के फैसले के अनुसार चूंकि अभियोजन पक्ष आरोपी पुलिसकर्मियों की पहचान साबित करने में नाकाम रहा है और राज्य सरकार आरोपियों की पहचान नहीं करा पाई। इस आधार पर अदालत द्वारा मुस्लिम समुदाय से संबंध रखने वाले 40 लोगों की सामूहिक हत्या के आरोपी 16पुलिसकर्मियों को बरी कर दिया गया। गौरतलब है कि 1987 का यह वही दौर था जबकि केंद्र्र तथा उत्तर प्रदेश दोनों ही जगह कांग्रेस की सरकारें थीं। दिल्ली में राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे तो उत्तर प्रदेश में वीर बहादुर सिंह उस समय मुख्यमंत्री थे। इसी दौर में विवादित बाबरी मस्जिद का ताला खोलने का आदेश केंद्र सरकार द्वारा दिया गया था। जिसके बाद मेरठ सहित देश के कई शहरों में सांप्रदाकि हिंसा भडक़ उठी थी व सांप्रदायिक तनाव फैल गया था। यही वह दौर था जबकि तत्कालीन केंद्रीय मंत्री मुफती मोहम्मद सईद तथा कांग्रेस के सांसद सलीम इकबाल शेरवानी जैसे कई दिग्गज कांग्रेस नेताओं द्वारा पार्टी को अलविदा कह दिया गया था।

गोया स्वयं को धर्मनिरपेक्ष दर्शाने वाली कांग्रेस पार्टी में सांप्रदायिकता व सांप्रदायिक आधार पर पक्षपातपूर्ण फैसले लेने के आरोप लगने शुरु हो चुके थे। उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता होने के बावजूद देश के अल्पसंख्यकों की नज़रों में संदिग्ध धर्मनिरपेक्षतावादी नेता थे। उनके शासनकाल में उत्तर प्रदेश में कई सांप्रदायिक दंगे भी हुए और उस दौरान राज्य के अल्पसंख्यकों पर पुलिसिया कहर भी जमकर ढाए गए। खासतौर पर उत्तर प्रदेश की सांप्रदायिकता के लिए बदनाम पुलिस फोर्स पीएसी अर्थात् प्रोविंशियल आर्मड कांस्टेबलरी ने सांप्रदायिक दंगों व सांप्रदायिक तनावों के दौरान प्रदेश के अल्पंंख्यकों पर कई जगह मनमाने तरीके से कहर बरपा किया।

उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर के हाशिमपुरा मोहल्ले में 22 मई 1987 को घटी घटना भी ऐसी ही हृदयविदारक घटनाओं में से एक है जबकि क$फर््यू के दौरान मध्य रात्रि में पीएसी के जवान बड़ी संख्या में हाशिमपुरा मोहल्ले में पहुंचे थे। उन्होंने मुस्लिम समुदाय के घरों में तलाशी लेनी व बेगुनाह व निहत्थे लोगों की धर-पकड़ करनी शुरु कर दी। उसके बाद पीएसी के जवान लगभग 50 मुस्लिम युवकों को अपनी ट्रक में ठूंसकर मेरठ के समीप हिंडन नदी की गंग नहर के किनारे ले गए। मध्य रात्रि के अंधेरे में इन पुलिसकर्मियों ने ट्रक से एक-एक व्यक्ति को उतारना शुरु किया और एक-एक कर सभी को गोली मारकर नहर में फेंकते गए। इस सामूहिक हत्याकांड में 40 लोगों ने तो मौके पर ही दम तोड़ दिया। और उनकी लाशें नहर में दूर तक बह गईं।

Hashimpuraजबकि पांच लोग गंभीर रूप से घायल अवस्था में अपनी जान बचाने में सफल रहे। इन्हीं पांच लोगों ने चश्मदीद गवाह के तौर पर 28 वर्षों तक अदालत से इंसाफ मिलने की आस लगा रखी थी जो गत् 22 मार्च की तीस हज़ारी अदालत के फैसले के बाद बुरी तरह टूट गई। और मुस्लिम समुदाय के इन पीडि़त परिवारों के दिलों में अदालत तथा सरकार के प्रति स्वाभाविक रूप से अविश्वास का वातावरण पैदा हो गया। देश में इसके पूर्व भी 18 अप्रैल 1976 का तुर्कमान गेट गोलीकांड जिसमें एक सौ पचास से अधिक लोगों के मारे जाने का समाचार था, 13 अगस्त का मुरादाबाद का ईदगाह नरसंहार जिसमें 284 लोगों की हत्या पुलिस की गोलियों से हुई थी,1984 के सिख विरोधी दंगे, 24 अक्तूबर 1989 के भागलपुर के सांप्रदायिक दंगे जिनमें 1070 लोगों के मारे जाने क खबरें थीं, इस प्रकार के और भी कई ऐसे हादसे हमारे देश में होते रहे हैं जिनपर अदालतों द्वारा पीडि़त परिवारों को पूर्ण न्याय नहीं दिया जा सका और परिणामस्वरूप इन पीडि़त देशवासियों के दिलों में सरकार तथा अदालतों के प्रति अविश्वास पैदा हुआ।

इसी तस्वीर का एक पहलू यह भी है कि देश की अदालतें आमतौर पर अपना निर्णय साक्ष्यों तथा गवाहों के बयान के आधार पर दिया करती हैं। परंतु यदि किसी आपराधिक मुकद्दमे में राज्यों द्वारा साक्ष्य पेश नहीं किए जा सकते या राज्य जानबूझ कर साक्ष्य अदालतके समक्ष प्रस्तुत नहीं करता या फिर ऐसा करने में जानबूझ कर देर करता है या टालमटोल करता है तो इन परिसिथतियों में अदालत द्वारा आरोपियों को अपराधी होने के बावजूद विभिन्न परिस्थितियों में बरी कर दिया जाता है। फिर आखिर  इसे कैसा और कहां का न्याय माना जाएगा? मिसाल के तौर पर हाशिमपुरा नरसंहार में ही तत्कालीन पुलिस अधीक्षक वीएनराय द्वारा घटना में सम्मिलित आरोपियों के विरुद्ध नामज़द प्राथमिकी दर्ज कराई गई। उसके बावजूद उन्हें तफ्तीश से हटाकर राज्य सरकार द्वारा मामले को सीधेतौर पर अपने हाथों में ले लिया गया तथा सीबीसीआईडी के सुपुर्द कर अपनी मनमजऱ्ी की रिपोर्ट अपने मनमानी समयावधि में तैयार की जाने लगी।

दूसरी ओर इसी घटना के चश्मदीद गवाह वह पांचों लोग जोकि पुलिस की गोली का शिकार बने थे परंतु अपनी किस्मत से तथा मरने का नाटक करते हुए अपनी जान बचाने में सफल रहे, उनके द्वारा गवाही देने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई। यहां तक कि उनकी गवाहियों के आधार पर ही वह ट्रक भी अदालत के समक्ष पेश किया गया जिसमें मुसलमानों को ठूंसकर मारने के लिए लाया गया था। वह बंदूक़ें भी बरामद कर ली गईं जिनका इस्तेमाल उन्हें गोली मारने के लए किया गया था। उन सबके बावजूद अपराधियों का बरी हो जाना हमारे देश की सरकार व न्याय व्यवस्था के लिए शर्मनाक तो है ही साथ-साथ इस प्रकार के फैसले एक ओर तो पीडि़त परिवारों का देश की न्याय व्यवसथा से विश्वास उठने का कारण बन सकते हैं तो दूसरी ओर ऐसे जघन्य हत्याकांड में शामिल अपराधियों की हौसला अफज़ाई भी करते हैं। यही नहीं इससे भी अफसोसनाक बात तो यह है कि 28 वर्षों तक चले इस मुकद्दमे के दौरान एक भी आरोपी पुलिसकर्मी को राज्य सरकार द्वारा निलंबित किए जाने तक का कष्ट नहीं उठाया गया। ओर तो और इनमें कई आरोपियों को समय-समय पर पदोन्नति भी दी गई। क्या आरोपियों का निलंबित न होना तथा निलंबन के बजाए उनका पदोन्नत होना यह सोचने के लिए मजबूर नहीं करता कि अपनी सेवा के दौरान ऐसे आरोपी अपने विरुद्ध चल रहे नरसंहार के इस मुकद्दमे से संबंधित साक्ष्यों को तथा संबंधित दस्तावेज़ों को प्रभावित भी कर सकते थे?

हमारे देश में न्याय व्यवस्थ से जुड़ी कई कहावतें बहुत प्रचलित हैं। एक तो यह कि ‘न्याय मिलने में देरी होने का अर्थ है न्याय से इंकार करना’ अर्थात् delayed justice denied.अब इस कहावत के परिपेक्ष्य में यदि हाशिमपुरा कांड को देखा जाए तो इसकी और भी शर्मनाक व्याख्या दिखाई देती है। यानी कि एक तो इंसा$फ में देरी भी हुई और उस देरी के बाद भी पीडि़तों को न्याय के बजाए अन्याय ही हाथ लगा? ऐसी ही एक कहावत के अनुसार अदालत द्वारा सौ गुनहगारों को तो बरी किया जा सकता है परंतु एक बेगुनाह को फांसी पर नहीं लटकाया जा सकता। निश्चित रूप से हाशिमपुरा नरसंहार जैसे फैसले उपरोक्त कहावत को चरितार्थ करते ही रहते हैं। यानी हमारे देश की अदालतें किसी न किसी साक्ष्य या गवाही के अभाव के बहाने अक्सर अपराधियों को बरी करती ही रहती हैं। उदाहरण स्वरूप इसी हाशिमपुरा हत्याकांड के मामले में अदालत ने यह स्वीकार किया कि पुलिस ने लोगों का उनके घरों से अपहरण किया,उन्हें उनके घरों से उठाकर ले गई, उन्हें गोली मारी गई। परंतु इन सब बातों को स्वीकार करने के बाद भी एक भी पुलिसकर्मी अपराधी साबित न हो सका?

देश की न्याय व्यवस्था की साख बचाए रखने के लिए यह ज़रूरी है कि ऐसे मामलों की पुन: नए सिरे से जांच कराई जाए तथा ऐसे हाई प्रोफाईल हत्याकंाड अथवा अपराध के लिए त्वरित न्याय की व्यवस्था की जाए। यदि भविष्य में भी इसी प्रकार के निर्णय अदालत द्वारा लिए जाते रहे तो लोगों का विश्वास देश की अदालतों से उठना स्वाभाविक होगा। और ऐसे हालात हमारे देश की सा$फ-सुथरी व निष्पक्ष छवि रखने वाली अदालतों के लिए अच्छे नहीं होंगे।

:-निर्मल रानी

nirmalaनिर्मल रानी 
1618/11, महावीर नगर,
अम्बाला शहर,हरियाणा।
फोन-09729-229728

Related Articles

ऑस्‍ट्रेलिया के परमाणु पनडुब्‍बी लेने पर चीन आगबबूला, ग्‍लोबल टाइम्‍स ने बताया अमेरिकी ‘Dog’

पेइचिंग : चीनी नौसेना के बढ़ते खतरे को देखते हुए ऑस्‍ट्रेलिया के महाविनाशकारी परमाणु पनडुब्‍बी बनाने के ऐलान से ड्रैगन का सरकारी मीडिया आगबबूला...

पब में फैशन शो को हिंदू संगठन ने जबरन कराया बंद, अयोजक पर लव-जिहाद बढ़ाने का आरोप

इंदौर : इंदौर के विजयनगर में एक पब में फैशन शो का आयोजन किया गया था, लेकिन हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं के हंगामे के...

यूपी चुनाव : आम आदमी पार्टी का सियासी दाव, सरकार बनी तो 300 यूनिट फ्री बिजली देंगे

लखनऊ : दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने लखनऊ में प्रेस कांफ्रेन्स करते हुए बड़ा एलान किया है। सिसोदिया ने कहा कि अगर...

आगामी उपचुनाव व मोदी के जन्मदीन की तैयारियों को लेकर सनावद भाजपा की बैठक सम्पन्न

सनावद: राष्ट्रीय सह कोषाध्यक्ष व मंदसौर सांसद सुधीर गुप्ता ने कार्यकर्ताओं को सम्बोधित कर आगामी समय मे उपचुनाव की तैयारियों को लेकर चर्चा की...

माँग कर खाने वालांे व कचरा उठाने वालों को भी मिलेगा, मुफ्त खाद्यान्न

हरदा: राष्ट्रीय खाद्यान्न सुरक्षा अधिनियम के तहत प्राथमिकता श्रेणी माँग कर खाने वाले एवं कचरा बीनकर जीवन-यापन करने वाले व्यक्ति एवं उसके परिजन को...

खंडवा : बाइक चोरी के आरोपी की पुलिस हिरासत में संदिग्ध मौत

खंडवा : खरगोन के बिष्ठान के बाद खंडवा में भी पुलिस हिरासत में मौत का मामला सामने आया है। बाइक चोरी के आरोपी की...

लोजपा सांसद प्रिंस पासवान के खिलाफ दुष्कर्म मामले में केस दर्ज, एफआईआर में चिराग का भी नाम

नई दिल्लीः लोक जनशक्ति पार्टी के सांसद और चिराग पासवान के चचेरे भाई प्रिंस राज पासवान के खिलाफ दिल्ली के कनॉट प्लेस थाने में दुष्कर्म...

कांग्रेस छोड़ने वाले कर्नाटक के MLA का खुलासा, ”बीजेपी ज्‍वॉइन करने के लिए पैसे ऑफर किए थे ”

बेलगांव (कर्नाटक): भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक श्रीमंत बालासाहेब पाटिल (Shrimant Balasaheb Patil) ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा कि कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस...

भूपेंद्र पटेल ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, पीएम मोदी ने दी बधाई, रूपाणी को लेकर कही बड़ी बात

अहमदबाद :गुजरात के मनोनीत नए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने आज राज्य के 17वें मुख्यमंत्री के तौर पर राज्यपाल के समक्ष पद और गोपनीयता की शपथ...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Stay Connected

5,577FansLike
13,774,980FollowersFollow
121,000SubscribersSubscribe
- Advertisement -

Latest Articles

ऑस्‍ट्रेलिया के परमाणु पनडुब्‍बी लेने पर चीन आगबबूला, ग्‍लोबल टाइम्‍स ने बताया अमेरिकी ‘Dog’

पेइचिंग : चीनी नौसेना के बढ़ते खतरे को देखते हुए ऑस्‍ट्रेलिया के महाविनाशकारी परमाणु पनडुब्‍बी बनाने के ऐलान से ड्रैगन का सरकारी मीडिया आगबबूला...

पब में फैशन शो को हिंदू संगठन ने जबरन कराया बंद, अयोजक पर लव-जिहाद बढ़ाने का आरोप

इंदौर : इंदौर के विजयनगर में एक पब में फैशन शो का आयोजन किया गया था, लेकिन हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं के हंगामे के...

यूपी चुनाव : आम आदमी पार्टी का सियासी दाव, सरकार बनी तो 300 यूनिट फ्री बिजली देंगे

लखनऊ : दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने लखनऊ में प्रेस कांफ्रेन्स करते हुए बड़ा एलान किया है। सिसोदिया ने कहा कि अगर...

आगामी उपचुनाव व मोदी के जन्मदीन की तैयारियों को लेकर सनावद भाजपा की बैठक सम्पन्न

सनावद: राष्ट्रीय सह कोषाध्यक्ष व मंदसौर सांसद सुधीर गुप्ता ने कार्यकर्ताओं को सम्बोधित कर आगामी समय मे उपचुनाव की तैयारियों को लेकर चर्चा की...

माँग कर खाने वालांे व कचरा उठाने वालों को भी मिलेगा, मुफ्त खाद्यान्न

हरदा: राष्ट्रीय खाद्यान्न सुरक्षा अधिनियम के तहत प्राथमिकता श्रेणी माँग कर खाने वाले एवं कचरा बीनकर जीवन-यापन करने वाले व्यक्ति एवं उसके परिजन को...