23.8 C
Indore
Friday, October 23, 2026

‘जय जवान-जय किसान’ की खुल गई पोल

2 अक्तूबर को एक बार फिर गत् दिवस देश ने गांधी-शास्त्री जयंती मनाने की औपचारिकता निभाई। वैसे भी देश, गांधी व शास्त्री जी को याद तो ज़रूर करता है परंतु क्या उनके चित्रों पर फूल माला चढ़ा देने मात्र से या उनके जीवन वृतांत बताने वाले भाषण या आलेखों से ही ऐसे महान नेताओं को श्रद्धांजलि दिए जाने का कर्तव्य पूरा समझ लिया जाना चाहिए? महात्मा गांधी ने यदि हमें सत्य व अहिंसा का पाठ पढ़ाया और उनकी विश्वव्यापी स्वीकार्यता का कारण भी उनका यही सिद्धांत बना तो क्या हमें यह सोचने की ज़रूरत नहीं कि आखिर गांधी के अपने देश में इन दिनों सत्य व अहिंसा के उनके सिद्धांत की क्या धरातलीय स्थिति है? क्या गांधी के हाथ में झाड़ू थमा कर उन्हें स्वच्छ भारत मिशन से जोडक़र ही गांधी के समस्त आदर्शों व सिद्धांतों तक पहुंचा जा सकता है?

इसी प्रकार देश को ‘जय जवान-जय किसान’ का नारा देने वाले देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के इस नारे को हम अपने देश में कितना कारगर होता देख रहे हैं? क्या भारत जैसे उस महान देश में जहां कि किसानों को अन्नदाता कहा जाता हो और इन्हीं की बदौलत भारतवर्ष को कृषि प्रधान देश भी कहा जाता हो, आज यदि उस देश का किसान फांसी पर चढऩे को मजबूर हो या ज़हर खाकर आत्महत्या करने को मजबूर हो या साहूकार के कर्ज के बोझ तले दबकर मरना उसकी नियति में शामिल हो या फिर जो किसान खाद-बीज के पैसे की कमी के चलते अपनी खेती-बाड़ी छोडक़र कस्बों व शहरों में रिक्शा चलाने,मज़दूरी करने या दूसरे के खेतों में काम करने के लिए विवश हो,क्या हमारे कृषि प्रधान देश के अन्नदाता की क्या यही असली तस्वीर है?

और तो और हद तो उस वक्त पार हो गई जब गत् 2 अक्तूबर को शास्त्री जी का दिया हुआ नारा जय जवान-जय किसान बोलते हुए जब हज़ारों किसानों का एक पैदल मार्च उत्तर प्रदेश व दिल्ली की सीमा पर राजघाट की ओर बढ़ते हुए पहुंचा तो इन्हीं ‘जय जवानों’ ने उन हज़ारों ‘जय किसानों’ के ऊपर आंसू गैस के गोले छोड़े,उनपर रबर की गोलियां चलाईं तथा लाठी चार्ज भी किया। कई किसानों को गंभीर से लेकर मामूली चोटें भी आईं।

गौरतलब है कि देश के प्रमुख किसान संगठन भारतीय किसान यूनियन द्वारा इस मार्च का आयोजन किया गया था। इसमें विभिन्न राज्यों के किसान शामिल थे जो सरकार को उसके द्वारा किए गए वादों की याद दिलाने के लिए दो अक्तूबर को राजघाट पहुंच कर अहिंसा के पुजारी तथा गांधीवाद के प्रसारक महात्मा गांधी की समाधि स्थल पर शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे। मोटे तौर पर इन किसानों की वही मांगे थी जो सत्ताधारी नेताओं द्वारा चुनाव के समय में किसानों सहित समाज के अलग-अलग वर्गों के लोगों को आकर्षित करने हेतु जिनके वादे किए गए थे। इनमें खासतौर पर किसानों की कर्ज माफी,बिजली के बिल की माफी,गन्ने का बक़ाया भुगतान जैसी मांगे शामिल हैं। हालांकि विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा किसानों कीकर्ज माफी की घोषणा तो ज़रूर की गई है परंतु सरकार की इस घोषणा से सभी कजर्दार किसान लाभान्वित नहीं हो पा रहे हैं। क्योंकि कर्ज माफ़ी के अंतर्गत् सरकार द्वारा निर्धारित श्रेणियों में आने वाले किसान ही शामिल हैं।

वैसे भी देश की अधिकांश किसान यूनियन स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करवाना चाहती हैं। परंतु सरकारें इस रिपोर्ट को पूरी तरह से लागू नहीं कर पा रही हैं। ऐसा न कर पाने के लिए निश्चित रूप से या तो देश के नेताओं व शासकों की नीयत में खोट है या फिर वे देश के किसानों की खुशहाली देखना नहीं चाहते। या फिर सरकार इन सिफारिशों को लागू कर पाने में ही सक्षम नहीं है।

2004 में गठित नेशनल कमीश्र ऑन फार्मर्स ने अपनी सिफारिशों में किसानों के हितों से संबंधित जिन बिंदुओं को मु य रूप से चिन्हित किया था उनमें किसानों को कम कीमत में उच्च श्रेणी के बीज मुहैया कराना,किसानों के ज्ञानवर्धन हेतु ज्ञान चौपाल बनाना,महिला किसानों को क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराना,समय-समय पर आने वाली प्राकृतिक आपदाओं का मुकाबला करने हेतु कृषि जोखिम फंड की स्थापना करना,फसल के उत्पादन मूल्य से पचास प्रतिशत अधिक फसल का दाम निर्धारित करवाना,प्रयोग में न आने वाली ज़मीन को भूमिहीन किसानों में आबंटित कर देना, वन भूमि को कृषि के अतिरिक्त किसी भी दूसरे काम के लिए किसी कारपोरेट अथवा औद्योगिक घरानों को आबंटित न करना, सभी किसानों को फसल बीमा सुविधा उपलब्ध करवाना तथा कृषि जोखिम $फंड का निर्धारण आदि बातें शामिल हैं।

स्वामीनाथन आयोग की उपरोक्त सिफारिशों में से हालांकि कई सिफारिशें अलग-अलग रूप में विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा मानी भी जा चुकी हैं। परंतु इन सिफारिशों को अभी तक समग्र रूप से लागू नहीं किया जा सका है। बजाए इसके हमारे देश के अन्नदाताओं को और भी नित नए नियमों व कानूनों से बांधने की कोशिश की जाती है। मिसाल के तौर पर फसल की कटाई के बाद खेतों में पड़े कचरे में आग लगाना कानूनन जुर्म हो गया है। सरकार खेतों में कूड़ा-करकट जलाने से तो रोकती है परंतु किसान इस कचरे को कैसे समेटे,क्या करे, कहां ले जाए और इस कचरा उठान व निपटान प्रक्रिया में आने वाले खर्च को कौन वहन करेगा, इसकी कोई योजना नहीं।

ऐसे में यदि देश का किसान यह पूछे कि जब अंतरिक्ष में चक्कर लगाने वाली सेटेलाईट को खेतों से उठने वाला धुंआ दिखाई दे जाता है और वैज्ञानिक इस निष्कर्ष पर पहुंच जाते हैं कि भारतीय किसान ग्लोबल वार्मिंग बढ़ाने में अपना योगदान दे रहा है फिर आखिर किसानों का यह सवाल क्योंकर नाजायज़ है कि फिर उन्हीं सेटेलाईट को यह क्यों नहीं दिखाई देता कि किसानों की फसल सूखे से तबाह हो गई है,बाढ़ में बह गई या सड़ गई है या फसल की पैदावार उ मीद से कम हुई है और सरकार ऐसी सूचनाओं के आधार पर किसानों के मुआवज़े क्यों निर्धारित नहीं करती?

जय जवान-जय किसान की क़लई उस समय तो खुल ही गई जब बापू व शास्त्री जी को याद करते नारा लगते हुए राजघाटकी ओर बढ़ते किसानों से पुलिस पूरी ताकत के साथ जूझ रही थी तथा उनपर बल प्रयोग कर रही थी। साथ ही साथ देश के मु य धारा के कई प्रमुख टीवी चैनल्स को भी इसी दिन बेशर्मी का लिबास ओढ़े हुए उस समय देखा गया जबकि हज़ारों किसानों की यह भीड़ दिल्ली राजघाट की ओर बढ़ती हुई टीवी चैनल्स को नज़र नहीं आई। इतिहास कभी भी सत्ता के चाटुकार ऐसे मीडिया घरानों को माफ नहीं करेगा जो गांधी-शास्त्री जयंती पर बापू व शास्त्री जी को याद करने की खबरें प्रसारित कर औपचारिकता तो ज़रूर पूरी कर लेते हैं परंतु इन्हीं टीवी चैनल्स को इन किसानों की फरियाद,इनकी मांगे,इनपर बरसने वाला पुलिसिया कहर,इनकी दुर्दशा,इनकी आर्थिक स्थिति आदि कुछ भी दिखाई नहीं देती।

इसके पहले भी दिल्ली,मध्यप्रदेश तथा महाराष्ट्र में गत् कुछ महीनों के भीतर कई बड़े से बड़े किसान आंदोलन हो चुके हैं। परंतु इसी चाटुकार व दलाल मीडिया ने हमारे देश के अन्नदाताओं से जुड़े समाचारों को प्रमुखता से प्रसारित नहीं किया। इसके बजाए इसी किसान आंदोलन के जो भी जवाबी पक्ष सरकार,सरकारी प्रवक्ताओं,किसी मंत्री या मु यमंत्री की ओर से दिए जा रहे थे उसके प्रसारण में यह दलाल मीडिया ज़रूर पूरी चुस्ती व चौकसी दिखा रहा था। अत: यह कहना गलत नहीं होगा कि गत् गांधी शास्त्री जयंती के मौके पर जय जवान-जय किसान नारे की पोल पूरी तरह खुल गई है।

निर्मल रानी

Related Articles

OlaSpill kasino: Hvilke bonuser kan du forvente i 2026?

Online kasinoer har blitt en viktig del av underholdningslandskapet, og OlaSpill er intet unntak. I 2026 kan spillere forvente et variert tilbud med attraktive...

Wypłacalne kasyna internetowe 2026: przegląd mobilnych aplikacji do gier

W 2026 roku kasyna internetowe zyskały na popularności, a ich oferta staje się coraz bardziej różnorodna. Wiele osób decyduje się na korzystanie z mobilnych...

Technology in the Gambling World How It Changes Players' Mood

Technology in the Gambling World How It Changes Players' Mood Η εξέλιξη της τεχνολογίας στον τζόγο Η τεχνολογία έχει φέρει επανάσταση σε όλους τους τομείς της...

Donbet Casino mobile app: quick download guide for seamless gaming on the go

The Rise of Mobile Casinos The gaming industry has seen a transformative shift over the last few years, with mobile casinos emerging as a dominant...

Stake Casino Deutschland im Fokus: So schützen Sie Ihr Konto und Ihre Daten

Die Welt der Online-Casinos hat in den letzten Jahren rasant an Beliebtheit gewonnen. Besonders in Deutschland nutzen immer mehr Spieler die Vielfalt und die...

Fast and secure registration: your gateway to the best online casino experience

When diving into the world of online casinos, players are often met with a myriad of options. Fast and secure registration processes can greatly...

SlotsGallery Casino: quali giochi provare per vincere nel 2026

Nel 2026, il mondo dei casinò online continua a evolversi, e SlotsGallery Casino si distingue come una delle piattaforme più promettenti per gli appassionati...

Scopri come massimizzare i bonus nei casinò boho nel 2026

Nel 2026, i casinò boho stanno emergendo come una scelta sempre più popolare tra gli appassionati di gioco online. Questi casinò offrono un mix...

Woolbet Casino: quali giochi live provare per un’esperienza coinvolgente

Il mondo dei casinò online offre una vasta gamma di esperienze, e Woolbet Casino è un esempio perfetto di questo. Con una selezione diversificata...

Stay Connected

5,577FansLike
13,774,980FollowersFollow
144,000SubscribersSubscribe
- Advertisement -

Latest Articles

OlaSpill kasino: Hvilke bonuser kan du forvente i 2026?

Online kasinoer har blitt en viktig del av underholdningslandskapet, og OlaSpill er intet unntak. I 2026 kan spillere forvente et variert tilbud med attraktive...

Wypłacalne kasyna internetowe 2026: przegląd mobilnych aplikacji do gier

W 2026 roku kasyna internetowe zyskały na popularności, a ich oferta staje się coraz bardziej różnorodna. Wiele osób decyduje się na korzystanie z mobilnych...

Technology in the Gambling World How It Changes Players' Mood

Technology in the Gambling World How It Changes Players' Mood Η εξέλιξη της τεχνολογίας στον τζόγο Η τεχνολογία έχει φέρει επανάσταση σε όλους τους τομείς της...

Donbet Casino mobile app: quick download guide for seamless gaming on the go

The Rise of Mobile Casinos The gaming industry has seen a transformative shift over the last few years, with mobile casinos emerging as a dominant...

Stake Casino Deutschland im Fokus: So schützen Sie Ihr Konto und Ihre Daten

Die Welt der Online-Casinos hat in den letzten Jahren rasant an Beliebtheit gewonnen. Besonders in Deutschland nutzen immer mehr Spieler die Vielfalt und die...