26.1 C
Indore
Saturday, September 19, 2026

एनआरसी -राजनीतिक स्वार्थ से नही जनभावना को ध्यान पर रखके बने कानून

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विगत दिनों राज्यसभा में अपने एक बयान में कहा कि वर्तमान केंद्र सरकार सारे देश में एनआरसी( नेशनल रजिस्टर आफ सिटीजंस) लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। किसी भी धर्म विशेष के लोगों को एनआरसी से भयभीत होने की जरूरत नहीं है। केंद्रीय गृह मंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि एनआरसी में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है ,जिसके आधार यह कहां जाए की किसी धर्म विशेष के लोगों को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा। सभी धर्मों को मानने वाले लोगों को एनआरसी में शामिल किया जाएगा।

पिछले कुछ समय से सरकार द्वारा निकट भविष्य में संसद में पेश किए जाने वाले नागरिकता संशोधन विधेयक को एनआरसी से जोड़कर एनआरसी के बारे में जो आशंकाएं व्यक्त की जा रही है, उन्हें भी केंद्रीय गृह मंत्री ने निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक एक अलग प्रक्रिया है। उसका एनआरसी से कोई संबंध नहीं है। बताया जाता है कि प्रस्तावित नागरिकता संशोधन विधेयक में यह प्रावधान है कि इससे पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले हिंदू ,सिख ,बौद्ध, जैन ,पारसी और ईसाई धर्म मानने वाले अवैध प्रवासियों को भारत की नागरिकता हासिल करने की पात्रता मिल जाएगी। ऐसे गैर मुस्लिम समुदाय के लोग भारत में 6 साल गुजार लेते हैं तो उन्हें भारत की नागरिकता मिल जाएगी।गौरतलब है कि पहले यह अवधि 11 साल थी। इस विधेयक में यह भी प्रावधान है कि अवैध तौर पर रह रहे लोगों को वापस उनके देश भेजा जा सकेगा या उन्हें हिरासत में भी लिया जा सकता है।

केंद्रीय गृह मंत्री ने सारे देश में एनआरसी लागू करने के बारे में राज्यसभा में जो बयान दिया है, उसका सबसे पहले विरोध पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने किया है। उन्होंने कहा कि धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता है। राज्य में किसी को भी डरने की जरूरत नहीं है। ममता बनर्जी ने तो यहां तक कह दिया है कि वह पश्चिम बंगाल में इसे लागू ही नहीं होने देगी। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में भी बांग्लादेशी घुसपैठियों की एक बड़ी आबादी बरसों से रह रही है। यह आबादी ममता बनर्जी की पार्टी का वोट बैंक बन चुकी है। इसलिए यह समझना कठिन नहीं है कि ममता बनर्जी एनआरसी का विरोध क्यों कर रही है। ममता बनर्जी इसका पहले भी कई बार विरोध कर चुकी है। शायद यह भूल गई है कि इसकी तैयारी का काम सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में किया गया था। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार संपन्न की गई प्रक्रिया को चुनौती वे कैसे दे सकती,लेकिन उन्हें तो 2021 में होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव की चिंता सता रही है। उन्हें डर है कि जिस तरह भाजपा लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी से कई सीटें छीनने में सफल हो गई थी, उसी तरह कहीं व विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के घर में सेंध लगाने में सफल ना हो जाए। इसलिए एनआरसी का उनके द्वारा विरोध किया जाना उनकी चुनावी रणनीति का ही एक हिस्सा प्रतीत होता है।

देशभर में एनआरसी लागू करने के बारे में केंद्रीय गृहमंत्री का बयान आते ही असम सरकार के एक मंत्री हेमंत विस्वा सरमा की ओर से यह मांग की गई है कि अगर सरकार पूरे देश में इसे लागू करती है तो असम में भी इसकी प्रक्रिया नए सिरे से प्रारंभ की जानी चाहिए। गौरतलब है कि असम में एनआरसी के अंतिम सूची में लगभग 19 लाख लोगों के नाम शामिल नहीं किए गए हैं। असम में लगभग तीन करोड़ 30 लाख लोगों ने एनआरसी में अपना नाम शामिल करने के लिए आवेदन किया था। एनआरसी जो प्रारूप जारी किया गया था, उसमें 42 लाख लोगों के नाम छूट गए थे। अंतिम सूची में यह संख्या घटकर 19 लाख रह गई थी। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि असम में एनआरसी तैयार करने का काम सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में किया गया था। दरअसल असम में अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशी घुसपैठियों का पता लगाने के लिए एनआरसी तैयार की गई थी, परंतु इसमें कई प्रतिष्ठित हस्तियों के नाम भी छूट गए थे। यद्यपि सरकार ने ऐसे लोगों को फिर से अपना नाम जुड़वाने हेतु आवेदन एवं अपील करने की सुविधा प्रदान की है, परंतु इसके बाद भी असम की एनआरसी के पूरी तरह त्रुटि रहित रह पाने के बारे में शंका व्यक्त की जा रही है। यही कारण है कि असम के मंत्री देश में एनआरसी लागू करने की योजना में असम को भी शामिल करने की मांग कर रहे है।

सवाल यह उठता है कि सारे देश में एनआरसी लागू करने के लिए सरकार क्या असम की एनआरसी को दरकिनार करके नए सिरे से उसके प्रावधान तय करेगी। असम का एनआरसी मॉडल संपूर्ण देश में लागू किया गया तो उसमें खामियां रह जाने की आशंका बनी रहेगी और जिस तरह असम में एनआरसी ने असंतोष को जन्म दिया है, वैसा ही असंतोष को दूसरे राज्यों में भी काबू करना राज्य सरकारों के लिए कठिन चुनौती होगा। इसमें कोई संदेह नहीं है कि जब एनआरसी की प्रक्रिया सारे देश में प्रारंभ होगी तो सरकार उससे जुड़े सारे पहलुओं पर बारीकी से गौर करने के बाद ही उस पर अंतिम फैसला लेगी ।वास्तव में सरकार ने ऐसा दृढ़ निश्चय कर रखा है तो उसके लिए पहले से ही सारी तैयारियां युद्ध स्तर पर करनी होगी।

असम में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में लगभग 16 सौ करोड़ की लागत से चार साल में तैयार की गई एनआरसी में जो खामियां रह गई है, उसके पीछे जो भी कारण रहे हो उन पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। सबसे पहले तो आवश्यकता इस बात की है कि असम की एनआरसी को पूरी तरह त्रुटिरहित बनाया जाए। फिर सारे देश में इसे लागू करने की दिशा में आगे बढ़ा जाए । आखिर इस सच्चाई से कैसे मुंह मोड़ा जा सकता है कि 16 सौ करोड़ रुपए की लागत से लगने के बाद असम एनआरसी की जो अंतिम सूची जारी की गई है ,उसमें ना तो भाजपा खुश है, न असम सरकार ,न विपक्ष और न ही आसम की जनता। इसलिए सरकार को यह तय करना होगा कि क्या सारे देश में एनआरसी को सचमुच इस तरह से लागू किया जा सकता है, जिससे हर पक्ष संतुष्ट रहें। इसके साथ सरकार को यह भी साबित करना होगा कि सारे देश में इसे लागू करने के पीछे उसका कोई राजनीतिक मकसद नहीं है।

देशभर में एक साथ एनआरसी लागू करने में भले ही काफी वक्त हो, परंतु इस बारे में कुछ सवाल अभी से उठने लगे हैं। पहला तो यह कि सारे देश में एनआरसी के लिए क्या एक समान दस्तावेज की आवश्यकता हर राज्य के नागरिकों को होगी। आसाम के लिए आधार वर्ष 1971 रखा गया था, परंतु क्या हर राज्य के लिए आधार वर्ष एक जैसा होगा या फिर हर राज्य के लिए अलग-अलग आधार वर्ष तय किया जाएगा। यदि किसी राज्य का कोई नागरिक व्यवसाय या नौकरी के सिलसिले में किसी दूसरे राज्य में निवास करने लगता है तो उसे अपनी पहचान साबित करने के लिए किस राज्य के पहचान पत्र या दस्तावेज की आवश्यकता होगी। इसके अलावा भी और कई सवाल है ,जो सारे देश में एनआरसी लागू करने में आने वाली दिक्कतों की ओर इशारा करते हैं।

निश्चित रूप से इससे जुड़ी जटिलताओं के समाधान के सारे उपायों पर विचार करने के बाद ही इस पर आगे बढ़ा जा सकता है। यहां एक सवाल और उठाया जा सकता है कि असम में तो बांग्लादेशी घुसपैठियों की संख्या लाखों में होने के कारण उनकी पहचान करना एनआरसी का असली मकसद था। यही बात पश्चिम बंगाल, पूर्वोत्तर राज्यों तथा तमिलनाडु के बारे में भी कही जा सकती है , परन्तु कुछ राज्यों की समस्या के कारण यदि पूरे देश में ऐसे लागू किया जाता है तो फिर इस पर आने वाली लागत और इसके लिए आवश्यक मशीनरी के बारे में भी विचार करना जरूरी है। कुल मिलाकर किसी भी स्थिति में एनआरसी लागू करने का फैसला आम नागरिकों के लिए परेशानी का सबब नहीं बनना चाहिए।

:- कृष्णमोहन झा

Related Articles

Pinup: seguridad y confianza en tus depósitos y retiros al jugar

El mundo de los casinos online ha crecido exponencialmente en los últimos años, y con él, la necesidad de plataformas seguras y confiables. Pinup...

Быстрые выплаты в Pin Up Casino: как вывести средства без задержек

В мире онлайн-казино вопрос быстроты выплат становится всё более актуальным для игроков. Все стремятся к тому, чтобы процесс вывода средств был максимально удобным и...

Ontdek de topgames van Spinita Online Casino: van slots tot live tafels

Online casino's hebben de afgelopen jaren een enorme groei doorgemaakt, en Spinita Online Casino is daarin geen uitzondering. Dit platform biedt een breed scala...

Snelle uitbetaling casino 2026: ontdek de snelste uitbetalingstijden met iDEAL

In de wereld van online gokken zijn snelle uitbetalingstijden cruciaal voor spelers die hun winsten snel willen ontvangen. Dit geldt vooral voor legale Nederlandse...

Maximize your gaming experience: Online Pokies NZ 2026 and the best bonus strategies

As we dive into the world of online gaming, the demand for engaging online pokies in New Zealand continues to soar. For players seeking...

Top licensed games to enjoy at Neosurf Casino Australia 2026: slots and more for

As the world of online gaming continues to grow, players are increasingly seeking out secure and exciting venues to enjoy their favorite casino games....

Waarom kiezen voor Beste Online Casino’s Zonder Limiet met een Curaçao-licentie?

Online casino's zijn een populaire keuze voor gamers die op zoek zijn naar gemak en mogelijkheden. Met de opkomst van online gokken is het...

Top Bonusangebote im Online Casino ohne LUGAS: Profitieren Sie 2026

Im Jahr 2026 hat die Welt der Online Casinos eine bemerkenswerte Entwicklung durchgemacht. Spieler, insbesondere aus Deutschland, suchen nicht nur nach einer Vielzahl von...

JugaBet Argentina: cómo maximizar tu bono de bienvenida en 2026

En el mundo de los casinos en línea, JugaBet Argentina se destaca no solo por su amplia variedad de juegos y apuestas deportivas, sino...

Stay Connected

5,577FansLike
13,774,980FollowersFollow
144,000SubscribersSubscribe
- Advertisement -

Latest Articles

Pinup: seguridad y confianza en tus depósitos y retiros al jugar

El mundo de los casinos online ha crecido exponencialmente en los últimos años, y con él, la necesidad de plataformas seguras y confiables. Pinup...

Быстрые выплаты в Pin Up Casino: как вывести средства без задержек

В мире онлайн-казино вопрос быстроты выплат становится всё более актуальным для игроков. Все стремятся к тому, чтобы процесс вывода средств был максимально удобным и...

Ontdek de topgames van Spinita Online Casino: van slots tot live tafels

Online casino's hebben de afgelopen jaren een enorme groei doorgemaakt, en Spinita Online Casino is daarin geen uitzondering. Dit platform biedt een breed scala...

Snelle uitbetaling casino 2026: ontdek de snelste uitbetalingstijden met iDEAL

In de wereld van online gokken zijn snelle uitbetalingstijden cruciaal voor spelers die hun winsten snel willen ontvangen. Dit geldt vooral voor legale Nederlandse...

Maximize your gaming experience: Online Pokies NZ 2026 and the best bonus strategies

As we dive into the world of online gaming, the demand for engaging online pokies in New Zealand continues to soar. For players seeking...