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Editorial – संपादकीय



ये देखना है कि पत्थर कहां से आया है?

वैसे तो मई 2014 में प्रधानमंत्री के पद पर नरेंद्र मोदी के सुशोभित होने के बाद ही देश में इस बात के $कयास लगाए जाने लगे थे कि क्या भारतवर्ष हिंदुत्ववादी राजनीति की गिरफ्त में आने जा रहा है? परंतु गत् वर्ष बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि भारत की आत्मा धर्मनिरपेक्ष ...

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मुबारक हो आपको फिर नई नौकरी मिल गई !

मुबारक हो आपके यहाँ चुनाव सम्पन्न हो गए और आपको फिर से नई नौकरी मिल गई । सोचिए मत सरकार ने कोई नई योजना नही लाँच की है और नही किसी तरह की कोई वैकेन्सी निकली है और तो और न ही किसी तरह का बेरोजगारी भत्ता देने की घोषणा की है । आपको नौकरी देने वाला व्यक्ति कोई और ...

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शराब: प्रतिबंध ज़रूरी या शासकीय संरक्षण?

शराब एक ऐसा नशीला पेय पदार्थ है जिसकी संभवत: कोई भी व्यक्ति यहां तक कि इसका सेवन करने वाले लोग भी इसके गुण,लाभ या विशेषताएं बयान नहीं कर पाते। हमारे देश में ऐसे लाखों परिवार मिल जाएंगे जो शराब की वजह से बरबाद हो चुके हैं। इस नामुराद नशीले द्रव्य ने न जाने कितने घरों को तबाह कर दिया,कितने परिवारों ...

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बैलगाड़ी पर सवार देश में हर किसी को सत्ता चाहिये

54 बरस में भारत कहां से कहां पहुंच गया। 1963 में पहली बार इसरो को साइकिल के कैरियर में राकेट बांधकर नारियल के पेडो के बीच थुबा लांचिग स्टेशन पहुंचना पड़ा था। और आज दुनिया भर के सौ से ज्यादा सैटेलाइट को एक साथ लांच करने की स्थित में भारत के वैज्ञानिक आ चुके हैं। लेकिन अंतरिक्ष देखना छोड दें ...

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वैलेंटाइन डे : पाबंदियों के बजाय जज़्बे को बलंदियों पर ले जाए

आज वैलेंटाइन डे है। मोहब्बत के इज़हार का दिन। अपना मुल्क अफ़ग़ानिस्तान छोड़ा तो उम्र काफ़ी कम थी। यौम-ए-मुहब्बत जैसे किसी दिन की याद नहीं आती। बीच के दिनों मे जब जाना हुआ तो भी नई नस्ल के दरमियान ऐसी कोई हरकत नहीं देखी। अम्मी बताती हैं कि तेईस-चौबीस साल पहले जब अब्बू के साथ उनकी मोहब्बत परवान चढ़ी थी ...

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कैसी दुनिया में जी रहे हम और हमारे बच्चे?

हम पहले क्या थे और आज हम किस दुनिया में जी रहे है इस पर कोई भी गौर नहीं कर रहा है, जिसके नतीजे आज की व्यस्क पीढ़ी में सामने भी आ रहे है। एकांकी जीवन और संयुक्त परिवारों के अभाव ने इतना कुछ बिखरा दिया है कि माता-पिता और पुत्र के रिश्तें पर भी विश्वास करने में विश्वास नहीं ...

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वेलेंटाइन डे: प्रेम के पक्ष में

वसन्त पंचमी अभी बीती है और वेलेन्टाईन डे एक बार फिर करीब है। शहर के थोड़ा बाहर जाये तो सरसों की पीली चादर ओढे धरती प्रेम का संदेश बाँट रही है और हवाएँ इसकी खुशबू से सराबोर है। ऐसे में इस बदलते हुए समय में प्रेम का मतलब क्या है? क्या है प्रेम की भारतीय परम्परा और कैसे उसे बदलती ...

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पीएम मोदी ने अखिलेश को बताया नकलची, करते है भाषणों की नकल

लखनऊ : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के बदायूं में एक रैली को संबोधित किया। इस रैली में एक बार फिर पीएम मोदी के निशाने पर सपा और कांग्रेस का गठबंधन रहा। पीएम ने अखिलेश पर भी जमकर हमला किया। पीएम ने कहा कि अखिलेश उनके भाषण की नकल करते हैं। वो उनकी तरह सवाल-जवाब पूछने लगे हैं। पीएम ...

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चुनाव: राजनीति में ‘स्वच्छता अभियान’ चलाने का शुभ अवसर

भारतीय गणतंत्र के कई प्रमुख राज्य अगले कुछ दिनों में विधानसभा के आम चुनावों से रूबरू होने जा रहे हैं। इन राज्यों में जहां उत्तरप्रदेश जैसा देश का सबसे बड़ा राज्य विधानसभा चुनाव का सामना करने जा रहा है वहीं मणिपुर व गोआ जैसे छोटे राज्यों व उत्तराखंड तथा पंजाब को भी चुनावों का सामना करना है। प्रत्येक चुनाव की ...

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पर्दा: सियासत और हकीकत

आमतौर पर पर्दा या नकाब या हिजाब प्रथा को इस्लाम धर्म से जोडक़र देखा जाता है। इस प्रथा को लेकर इस्लाम धर्म तथा इस्लामिक देशों में भी न केवल अलग-अलग तरह की राय है बल्कि पर्दा,हिजाब या नकाब धारण करने के महिलाओं के अलग-अलग तरीके भी हैं। अरब के कई देशों में सिर से लेकर पैर के नाखून तक तथा ...

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