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Editorial – संपादकीय



यादें : छुक छुक करती रेल गाड़ी

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छुक छुक करती ये रेल गाड़ी कहीँ निज़ाम , कहीँ हिंगोली तो कहीँ राजपुताना के नाम से जानी जाती है। लगभग 150 साल के सफ़र के बाद आखिर हमारी ये छुक छुक गाड़ी अब जवान और आधुनिक होने वाली हैं। हो भी क्यों न यौवन के लिए इस ने न जाने कितने प्रयास किए। दिन रात लोहे की इन पटरियों ...

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आम लोगों के बल पर ‘माननीयों’ का ‘खास’ बने रहना:कब तक?

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हमारे देश में जहां दो वक्त की रोटी और सिर पर छत व तन पर कपड़े के लिए एक आम आदमी को जी तोड़ मेहनत व परिश्रम करना पड़ता है और कोई भी आम आदमी अपनी मेहनत से अधिक कुछ भी अधिक हासिल नहीं कर पाता यहां तक कि कई श्रम क्षेत्र ऐसे भी हैं जहां कहीं प्रशासनिक गलतियों से ...

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क्रिसमस विशेष : संता से मांगी एक ’Wish’ मुहब्बत की

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  यह हमारे देश की सदियों पुरानी परंपरा रही है कि यहां सभी त्‍यौहारों को मिलजुल कर मनाया जाता है. हर त्यौहार का अपना ही उत्साह होता है- बिलकुल ईद और दिवाली की तरह.  क्रिसमस  ईसाइयों के सबसे महत्‍वपूर्ण त्‍यौहारों में से एक है. इसे ईसा मसीह के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाता है. क्रिसमस को बड़े दिन के ...

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‘जन’ के मन की वह जाने पर उनके मन की ‘राम’

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जबसे सत्तासीन हुए हैं तबसे उन्होंने जनता को संबोधित करने के लिए एक नई परिपाटी शुरु की है। वे एक माह में कम से कम एक बार देश की जनता को रेडियो प्रसारण के माध्यम से अपने मन की बात नामक एक कार्यक्रम के द्वारा संबोधित करते हैं। 27 नवंबर तक इस संबोधन के 26 एपिसोड पूरे ...

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नोटबंदी: करे कोई भरे कोई ?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी से उबरने के लिए देश की जनता से पचास दिनों की जो मोहलत मांगी थी उसकी समय सीमा भी अब समाप्त होने के करीब है। परंतु अभी तक दूर-दूर तक कोई भी ऐसे लक्षण दिखाई नहीं दे रहे जिनसे यह अंदाज़ा लगाया जा सके कि पचास दिन पूरे होने तक देश के आर्थिक हालात और ...

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छोटी सोच के बड़े मसीहा

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“कोस कोस पर पानी बदले , चार कोस पर वाणी”  इस पंक्ति का प्रयोग हम अक्सर भारत की विभन्नताओं को दर्शाने के लिए करते हैं और पूरी दुनिया को ये दिखाने का प्रयास करते हैं कि कैसे हम जाति , धर्म , स्थान विशेष से अलग होने के बावजूद एक ही है । पर कहते है न कि “ हाथी के दांत दिखाने के ...

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‘दिल’ न मिले तो ‘हाथ’ मिलाने का औचित्य ही क्या ?

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सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के मद्देनज़र मशहूर शायर निदा फाज़ली की एक मशहूर गज़ल का यह शेर बहुत लोकप्रिय है कि-‘दुश्मनी लाख सही,खत्म न कीजे रिश्ता-‘दिल मिले या न मिले हाथ मिलाते रहिए’। परंतु भारत-पाकिस्तान संबंधों के संदर्भ में कम से कम यह शेर अब तर्कसंगत प्रतीत नहीं होता। 1947 में भारत को मिली आज़ादी तथा इसी के साथ-साथ भारत ...

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नोटबंदी: क्या विरोध या आलोचना देशद्रोह है?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गत् 8 नवंबर को एक हज़ार व पांच सौ रुपये की भारतीय मुद्रा बंद किए जाने की घोषणा को दो सप्ताह से अधिक का समय बीत चुका है। परंतु अभी भी पूरे देश में आम लोगों को पैसों की लेन-देन के लिए काफी दिक्कतों को सामना करना पड़ रहा है। इस नोटबंदी का प्रभाव काला धन ...

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नोटबंदी पर फैसला सही, तैयारी आधी-अधूरी

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500 और 1000 रुपये के नोट को तत्काल बंद होने से लोगों में काले धन से निपट लेने का हौसला तो जगा है, लेकिन इससे पैदा हुई उनकी रोजमर्रा की दिक्कतें कम होने के बजाय बढ़ती ही जा रही हैं। जब तक बैंक एवं बैंक के एटीएम जहां से कैश मिल रहा है, कैश मिलना जब तक बंद नहीं हो ...

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भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ कतारों में खड़ा देश

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प्रधानमंत्री जी के इस निर्णय के बाद हम सभी ने इस फैसले का स्वागत किया और अब हम सभी कालेधन के खिलाफ इस जंग में शामिल हो चुके है। सारी परेशानियां उठा रहे है सब्जीवाले, ठेलेवाले, छोटे बड़े व्यापारी, कामकाजी लोग, किसान, घरेलू महिलाएं, ये सभी आज केवल कतारो में नोट निकालने नही खड़े है ये खड़े है उन लोगो ...

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